शुक्रवार, 4 मई 2018

नमस्कार। देखते ना देखते नए आर्थिक साल का एक महीना गुज़र गया है। समय कभी -कभी ज़्यादा ही जल्दी भागता रहता है। ज़्यादा जब आपको दिन में २४ घण्टे से ज़्यादा समय ज़रुरत हो। कब ज़रुरत होता है अधिक समय ?जब कि आप के पास अधिक मौके हो। अधिक मौके कब होते हैं जब कि आपके पास कॉन्फिडेंस हो। आज मैं ,अपने एक पाठक के फरमाइश पर अपने कॉन्फिडेंस को कैसे बढ़ा सकते हैं ,उस विषय पर चर्चा करूँगा। विशेष रूप से आज के युवा पीढ़ी का। जो कि ज़िन्दगी के दौर में जल्दी उलझ जा रही है। मैं अपना कॉन्फिडेंस बढ़ाने के लिए तीन मंत्रो पर विश्वास रखता हूँ।
पहला -हम किसी से कम नहीं -इस दुनिया मुझसे ज़्यादा काबिल और बेहतर इंसान ज़रूर मौजूद हैं। यह भी सच है कि मुझसे कम काबिल और बदतर इंसान भी जरूर मौजूद हैं। कितने लोग हमसे बेहतर हैं और कितने बदतर ,किसी को भी नहीं पता। परन्तु हमारी ज़िन्दगी बीत जाती है अपनी तुलना दूसरों के साथ करके। और हमारा कॉन्फिडेंस कमजोर बन जाता जब हम अपने आप को किसी के तुलना में बदतर समझते हैं। हम उनसे ईर्ष्या करते हैं। कभी यह सोचने का प्रयास नहीं करते हैं कि अगर कोई हमसे बेहतर है तो क्यों है ? हम इससे जितना चिंतित होते हैं ;किसी ऐसे इंसान से मिलकर जिनसे हम खुद मिलते हैं ; हम आनंदित नहीं होते हैं। एक उदाहरण लीजिए। हमारे बॉलीवुड के बादशाह ने कई बार इंटरव्यू में कहा है कि उनसे ज़्यादा लम्बा ;ज़्यादा ख़ूबसूरत ;ज़्यादा काबिल बॉलीवुड में विरजमान हैं ;लेकिन कई लोगों को उनके जैसा सफलता नहीं मिली है। उनके सफलता के केवल दो कारन हैं -खुद पर विश्वास और कड़ी मेहनत करने की क्षमता।
दूसरा -कोई भी परफेक्ट नहीं है। हो भी नहीं सकता है। हर इंसान में कोई न कोई प्रतिभा है ;कोई न कोई खामी है और ज़रूर कोई मजबूरी है। मेरा तजुर्बा यह कहता है कि लोग दूसरों की प्रतिभा और अपनी खामिओं से ज़्यादा वाकिफ हैं। दूसरों की प्रतिभा से अपनी तुलना कर अपना कॉन्फिडेंस कम कर लेते हैं। हर कोई विद्वान नहीं बन सकता है। क्लास का फर्स्ट बॉय का तात्पर्य यह नहीं है कि बाकी के ज़िन्दगी में भी वह फर्स्ट आएगा या क्लास के नीचे रैंक करने वाले उनसे ज़्यादा सफल नहीं होंगे। मैं अपने क्लास का लास्ट बॉय हूँ। जो लोग मुझे काम के सिलसिले में मिले हैं ;सोचते हैं कि मैं मजाक कर रहा हूँ ;जब मैं यह बात छेड़ता हूँ। क्यों ?क्यूंकि मेरे कॉन्फिडेंस को देखकर उनको यह विश्वास नहीं होता है। मैंने क्या किया ?एक ऐसा विषय चुना जो कि मेरे दिल के करीब है। जिस विषय पर चर्चा करना या काम करने में मुझे आनंद मिलता है। और जिस विषय को  मेरा अपना प्रतिभा मदत करता है। मेरे दोनों बेटों ने भी अपने दिलचस्पी वाले विषय को अपने करियर में बदलने का निर्णय लिया है। मूल बात है कि अपना कॉन्फिडेंस बढ़ाने के लिए अपना प्रतिभा और दिलचस्पी वाले विषय को अपना बनाइए। आप जो भी कर रहे हो उससे अगर आपको आनंद मिले ;तो आपका कॉन्फिडेंस खुद ब खुद बढ़ जायेगा।
तीसरा -असफलता से डरना -ऐसा कोई इंसान नहीं है जो कि ज़िन्दगी में असफल ना रहा हो। यही ज़िन्दगी की रीत है। और उसी से हम डरते हैं। हमारा कॉन्फिडेंस इसी डर के कारन कमजोर बन जाता है। हम ज़िन्दगी में कोई नए काम को हासिल करते हैं तो हमारा अपने आप पर कॉन्फिडेंस बढ़ता है या नहीं ? जरूर बढ़ता है। लेकिन हम प्रयास नहीं करते हैं। क्यों ?अगर असफल हो गए तो लोग क्या कहेंगे ?यही हमारी चिंता रहती है। इससे अपना कॉन्फिडेंस घटता है और हम अपना कॉन्फिडेंस बढ़ाने का मौका गवां देते हैं। छोटा सा उदाहरण -पब्लिक स्पीकिंग -यानि कुछ लोगों के सामने अपना विचार रखना। कभी न कभी तो पहला बार होगा। आप शायद स्टेज पर नर्वस भी होंगे। लेकिन एक बार आप सफल हो गए तो आपको कैसा महसूस होगा? खुद पर विश्वास बढ़ेगा या घटेगा ? मुझमे भी यही प्रोब्लेम था -असफलता से डर लगता था। लोग क्या कहेंगे। इस पर ज़्यादा ध्यान रहता था। ना कि अपनी काबिलियत पर। एक दिन किसी अनुभवी इंसान ने मुझे समझाया। मैंने कोशिश की। और मैं बदल गया। मैं ज़िन्दगी भर उनका आभारी रहूँगा क्योंकि मुझे अपने आप में इस बदलाव को लाने के बाद ज़िन्दगी से कई गुना ज़्यादा आनंद मिलने लगा है। नए विषय पर विजय पा कर अपना कॉन्फिडेंस लगातार बढ़ाता रहता हूँ। मैंने बहुत असफलताओं का सामना किया है। परन्तु हर असफलता ने मुझे ज़िन्दगी में सफलता से ज़्यादा सीख दिया है -मैं अब असफलता से डरता नहीं हूँ। और यही मेरे कॉन्फिडेंस का मूल मंत्र है।
मैं इस लेख में अपने आप को सफल तभी समझूंगा जब आप मुझे फेसबुक के जरिये अपना विचार व्यक्त करेंगे इस लेख के विषय में। आप मुझे किसी विषय पर लेख लिखने का फरमाइश कर सकते हैं। जैसा किसी पाठक ने किया है -जो कि मेरा अगले महीने का विषय रहेगा -selfishness
इंतज़ार करूँगा आपके विचारों का। 

बुधवार, 11 अप्रैल 2018

नमस्कार। एक और नया साल -आर्थिक यानि financial साल की शुरुआत। इनकम टैक्स का रिटर्न और कई सारे आर्थिक निर्णय का समय। साल के शुरू में प्लानिंग। लेकिन हम शुरुआत करेंगे इस साल का किसी अलग अंदाज़ के साथ -आप जैसे एक पाठक के अनुरोध पर मैं character कैसे बेहतर कर सकते हैं ,उस पर चर्चा करूँगा। मेरा विश्वास है कि character एक वक़्ति का परिचय है जो कि उसके सफलता या असफलता के सफर को दर्शाता है। एक उदाहरण लीजिए - किसी डॉन का -क्या नहीं होता उनके पास -दौलत , क्षमता , लोगों का उनसे डरना ,कई डॉन के लिए राजनीति के साथ संपर्क। लेकिन लोग क्या कहते हैं -डॉन -शब्द के साथ ही एक नेगेटिव character का सोच। एक दूसरा उदाहरण लीजिए -एक शिक्षक का -ज़्यादातर पॉजिटिव character का सोच। है ना ?
शुरू करते हैं character की परिभाषा से। हिंदी भाषा में character का पर्यायवाची शब्द है चरित्र। चरित्र शब्द का प्रयोग फिल्म और नाटक के चर्चे पर भी किया जाता है। और इस विषय में शायद आप मुझसे सहमत होंगे कि हम जैसे दर्शकों की सहानुभूति कभी फिल्म के विलन के प्रति भी होती है। और विलन ही हीरो बन जाता है। यद्यपि जो हरकतें वो फिल्म में करता है ,वह चरित्र के मूल्यांकन पर नेगेटिव है। डॉन ,दर ,खलनायक ऐसे कई फिल्मों के उदाहरण हैं। हमारा ऐसा डबल स्टैण्डर्ड क्यों ? जो चरित्र को हम नेगेटिव समझते हैं उसको हीरो क्यों बना देते हैं ?
मेरी चर्चा यहाँ से शुरू होती है। किसी भी फिल्म की सफलता के पीछे विलेन का किरदार हीरो से कम नहीं होता। गब्बर के बिना शोले नहीं बनता। गब्बर ने क्या किया ? एक नृशंष इंसान का चरित्र निभाया। लेकिन उस चरित्र को निभाने के लिए उन्हें खुद को विश्वास दिलाना पड़ा कि वो इतने निष्ठुर हैं। तभी जाकर उनके किरदार को इतना सवाँरा गया। मेरे लिए हमारा चरित्र हमारे विश्वास का अभिव्यक्ति है। अगर हमें अपना चरित्र बेहतर करना है ,तो हमें अपने विश्वास पर अटूट रहना पड़ेगा और उसकी अभिव्यक्ति करनी पड़ेगी चाहे कितनी बाधा आए। हमारे जितने स्वतंत्रता संग्रामी ने अपना प्राण न्योछावर किया उनमे यह विश्वास थी। हमारे लिए वो हीरो थे ,ब्रिटिश सरकार के लिए विलेन। उनमे भी किसी ने गाँधी जी का दिखाया हुआ मार्ग चुना ;कई लोगों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस का दर्शाया हुआ पथ चुना।
शुरू कीजिए अपने विश्वास के साथ। यह निर्णय आपका है। इस विषय में किसी का नक़ल ना करें। ऐसा कोई ना बनने की कोशिश करे जो कि आपकी असलियत नहीं है। अगर ऐसा पथ चुनोगे तो आपको सर्वदा अभिनय करनी पड़ेगी। और वह संभव नहीं है। इस सिलसिले में मैं कुछ महीने पहले राहुल द्रविड़ के एक मंतव्य का ज़िक्र करूँगा जिसको मीडिया ने गलत समझा था। राहुल ने चिंता व्यक्त की थी कि आजके उभरते क्रिकेटर विराट कोहली के अग्रेशन को नक़ल कर रहें हैं। जो कि उनका स्वाभाविक चरित्र नहीं है। जो कि विराट का चरित्र है। ऐसा करने से कोई विराट कोहली नहीं बन जाएगा। करना हो तो विराट का अनुशाषन और त्याग का चरित्र अनुकरण करो ;तब शायद आप बेहतर क्रिकेटर जरूर बन सकते हो।
एक और दिलचस्प अनुभव का जिक्र बनता है चरित्र के इस चर्चे के सन्दर्भ में। मध्य रात्रि का समय। रास्ते का सिगनल लाल। एक मोटरसाइकिल सवारी इंतेज़ार करता हुआ सिगनल हरा होने का। एक जनप्रिय टीवी प्रोग्राम के विज्ञापन के लिए ऐसे कई दृश्यों को दर्शाया गया था। याद है आपको। चरित्र दूसरों के लिए नहीं अपने लिए होता है। हमारा चरित्र कोई देख रहा है या नहीं उस पर निर्भर नहीं कड़ेगा। मुझे किसी के पास कुछ प्रमाण नहीं करना है अपने चरित्र के माध्यम से।
इस लेख का अंतिम उदाहरण। इस वर्ष भारत की under 19 क्रिकेट टीम विश्व कप जीतने में सफल हुई। टीम के कोच राहुल द्रविड़ के लिए भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड ने पचास लाख रुपयों के इनाम की घोषणा की। अन्य कोचिंग स्टाफ के लिए इनाम की रकम काफी कम थी। द्रविड़ ने बोर्ड के कार्यकर्ताओं को समझाया कि टीम के सफलता के पीछे अन्य कोचिंग स्टाफ का अवदान उनसे किसी अंश में कम नहीं है। और इसके कारन उनके इनाम के रकम को बढ़ाना पड़ेगा। इसके लिए राहुल ने अपनी रकम आधी कर दी। इतना ही नहीं ,एक कोचिंग स्टाफ जिनका इस दरम्यान निधन हो गया था ,उनके परिवार को उतनी ही रकम मिली जितना कि औरों को। यह है एक चरित्र जिसकी मैं श्रद्धा करता हूँ। करता रहूँगा। इसी तरह के चरित्र महान इंसान है। हमें इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। क्या आप इस तरह के चरित्र पर विश्वास रखते हैं ? क्या आपने अपने विश्वास का निर्णय कर लिया है ?जिस पर आप अपना चरित्र बनाएँगे ?जरूर लिखिएगा फेसबुक के माध्यम से। इंतज़ार करूँगा।

मंगलवार, 27 मार्च 2018

मार्च का महीना। बसंत ऋतु। होली का त्योहार। और स्कूल में बच्चो का टेंशन -परीक्षा का समय। ज़िन्दगी एक तेज़ रफ़्तार से गुज़रती हुई। कई अभिभावक बेहद चिंतित बच्चों के लिए। इस तनाव पूर्ण वातावरण में मुझे बिल गेट्स -माइक्रोसॉफ्ट के प्रतिष्ठाता का एक भाषण याद आ गया जो कि उन्होंने स्कूल के बच्चो को दिया था। आज उसी भाषण से कुछ सीख पेश कर रहा हूँ -आपके लिए।
ज़िन्दगी हर वक़्त आपके लिए निष्पक्ष नहीं होती है। कभी कभी ऐसा महसूस होता है कि ज़िन्दगी कहीं ज़्यादा निष्ठुर है आपके प्रति। समय और परिस्थितियाँ जब अपना साथ निभाती हैं तो हम खुश रहते हैं। चाहते हैं कि ज़िन्दगी ऐसे ही गुजरे। लेकिन ज़िन्दगी में उतार -चड़ाव एक ही सिक्के के दो पहलु हैं। हमें बच्चो को ज़िन्दगी के इस निष्ठुरता से वाकिफ कराना है और उन्हें समय से जूझने के लिए तैयार करना है जब कि ऐसा महसूस होता है कि उनके साथ अन्याय रहा है। यही वास्तव है जो शायद किसी स्कूल में सिखाया नहीं जाता है।
आप कितने काबिल हो और अपने विषय में क्या सोचते हो इससे दुनिया में किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। जब तक आप कुछ हासिल करके खुद को प्रमाणित नहीं करते हो तब तक कोई आपको पूछेगा तक नहीं। मजे वाली बात यह है कि आप कुछ हासिल करोगे तो आपको खुद अच्छा लगेगा और आपके चाहने वालों को भी। सफलता हर किसी को अनुप्राणित करती है और कोशिश करने के लिए नए मंज़िलों पर विजय पाने के लिए। लेकिन ऐसा भी समय आएगा जब सफलता पास आकर भी आपके हाथ नहीं आएगी। तभी आपको लगेगा कि ज़िन्दगी आपके साथ अन्याय कर रही है। कई जाने माने क्रिकेट खिलाड़ी ऐसे उतार -चड़ाव से अक्सर गुजरते हैं। तब आपको सुनने को मिलता है -फॉर्म इज़ टेम्पोररी ,क्लास इज़ परमानेन्ट।
स्कूल से निकल कर ही कोई करोड़पति नहीं बन जाता है और ना ही हर स्कूल ड्राप आउट बिल गेट्स बन जाता है। सब कुछ के लिए एक समय चाहिए ,और चाहिए मेहनत। अगर आपने स्कूल में अपना मौका गवां दिया है , इसका दोष आप अपने माता -पिता या अभिभावक को नहीं दे सकते हैं। अगर अपने गलतियां की है तो उन्हें justify करने का बहाना ना ढूंढें -उनसे सीखें और ज़िन्दगी में नई शुरुआत करे -नए जोश और संकल्प के साथ।
स्कूल में शिक्षक मदत करते हैं आपको परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए। क्योंकि कि उन्हें पता है आपको परीक्षा में किस तरह के प्रश्नो का सामना करना पड़ेगा। ज़िन्दगी लेकिन ऐसी नहीं है। क्या परीक्षा लेगी ,किसीको नहीं पता। किसी भी और किसी भी तरह के परीक्षा को जो इंसान हिम्मत और हौसले के साथ सामना करता है वही मुक़द्दर का सिकंदर कहलाता है।
कैसा लग रहा है बिल गेट्स का ज्ञान ? फेसबुक के माध्यम से ज़रूर बताईएगा मुझे। अगर आपको पसंद है तो अगले महीने इस चर्चा को आगे बढ़ाऊँगा।
उम्मीद करता हूँ कि आपके लिए होली आनंदमय रहा। दुवा करता हूँ कि आपका  आगे का सफर भी रंगीन और खुशियों से परिपूर्ण  हो। मिलते रहिएगा हर महीने के पहले सोमवार को। मेरी ख़ुशी आपसे मिल कर होती है।

गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018

नमस्कार। देखते -देखते नए साल का एक महीना गुज़र गया। सर्दियों का मौसम विदाई के द्वार पे खड़ा है। फ़रवरी का महीना सर्दी और गर्मी के मौसम को जोड़ने वाला सेतु है। मार्च के महीने में होली के उत्सव के माध्यम से हम गर्मी के मौसम की तैयारी करते हैं। फ़रवरी का महीना रोमांस का दिन -'वैलेंटाइन' दिवस -के लिए मशहूर है। इस दिन हम अपना प्यार ज़ाहिर करते हैं एक दुसरे के लिए। कई लोग वैलेंटाइन दिवस केवल युवा लोगों के लिए है सोचते हैं। यह गलत चिंता भावना है। प्यार कोई भी कर सकता है ,किसीसे भी। अक्सर हम प्यार की परिभाषा को बहुत ही संकीर्ण बना देते हैं। मेरा तजुर्बा यह बताता है कि कई लोग अपने प्यार की अभिव्यक्ति करने में झिझकते हैं।
आज हम प्यार या LOVE के मूल विषय पर चर्चा करेंगे आपके साथ -जिनको मैं प्यार करता हूँ ,बेहद ,क्योंकि आप हर महीने के पहले सोमवार को मिलते हो मुझसे , Doc -U -Mantra के माध्यम से। आप में से कुछ लोग मुझसे फेसबुक  पर भी मिलते रहते हो। ऐसे लोगों के साथ मेरा प्यार का रिश्ता और भी गहरा है।
LOVE या प्यार का नीव छुपा है LOVE शब्द में ही। कैसे ?समझाता हूँ आपको। प्यार के किसी भी रिश्ते में LOVE जरूरी है।
L-Listen actively  -प्यार में एक दुसरे को सुन्ना बहुत जरूरी है। क्या आप सुन पाते हो जो कि शब्दों के ज़रिए नहीं व्यक्त किया जा रहा है ?आप सुन रहे हो ,यही काफी नहीं है। आप अपने चाहने वाले को ध्यान से सुन रहे हो ,यह समझाना भी जरूरी है।
O- Observe carefully -एक दुसरे पर गौर कीजिए और ध्यान दीजिए। ऑब्जरवेशन के माध्यम से ही आप समझ पाईएगा उस सन्देश को , जो की शब्दों से नहीं बताया जा रहा है। व्यवहार में परिवर्तन, अभिमान, रूठना ,अचानक चुप हो जाना इस किस्म के कई संकेत हैं।
V -Value sentiments- sentiments यानि भावनाओं का कदर कीजिए। हर प्रकार का भावना महत्वपूर्ण है किसी भी प्यार के रिश्ते के लिए। गुस्सा ,अहंकार ,मज़ाक, दुःख -सब कुछ इस भावनाओ के और रिश्ते के अहम् अंग हैं। इन भावनाओं का इज़्ज़त करना और उनको सही तरीके से deal करना प्यार के रिश्ते को और भी मजबूत बनाता है।
E -Express your emotions - अक्सर हम प्यार के रिश्ते में अपने emotions या मन की बात को नहीं पेश करते हैं इस भय के कारन कि उनको चोट पहुंचेगी या दुःख होगा। यह गलत है। वह कैसा प्यार का रिश्ता है जिसमे 'मैं ',मैं नहीं रह सकता हूँ। अगर समझदारी नहीं है ;अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की स्वाधीनता नहीं है तोः वह प्यार क्या है ? emotions को express करना गलत नहीं है किसी भी प्यार के रिश्ते में। किस तरह हम एक्सप्रेस कर रहें हैं अपने emotions को ,वह अधिक महत्वपूर्ण है। याद है , मैंने कई महीनो पहले लिखा था ऐसे किसी लेख में -हम जो कहते हैं महत्वपूर्ण है ,कैसे कहतें हैं ,उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
LOVE के इस फार्मूला को तुरंत अपना लीजिए। इसके जरिए आप किसी के साथ अपने प्यार के रिश्ते में सबसे बड़ी ज़रुरत को हासिल कर पाएँगे -विश्वास -जिसके बिना कोई भी रिश्ता ,'रिश्ता 'नहीं बनता। प्यार भी एक पवित्र रिश्ता है।
तो इस वैलेंटाइन दिवस पर बेझिझक कह डालिए उन सब को जिनसे आप प्यार करते हैं -I LOVE YOU !जैसे कि मैं कह रहा हूँ ,बेझिझक -I LOVE YOU -आप सब का प्यार बना रहे ,बढ़ता रहे और परिपूर्ण हो यही दुवा है मेरी। याद रखिएगा -जितना आप प्यार करेंगे उससे कहीं ज़्यादा आपको प्यार मिलेगा अगर आपका प्यार सच्चा ,पवित्र और निःस्वार्थ हो। आपके प्यार का इंतेज़ार करूँगा फेसबुक के माध्यम से। यह लेख मैं उनको समर्पित करता हूँ जिन्होंने फेसबुक के जरिए मुझे अनुरोध किया था उनके लिए कुछ लिखने के लिए Doc -U -Mantra में. उम्मीद कर रहा हूँ कि आप पढ़ रही हो इस लेख को। बताइएगा जरूर। 

शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

नमस्कार। बधाई नए साल का। बधाई बाकि ज़िन्दगी के पहले दिन का। हर दिन हम लोगों के लिए बचे हुए ज़िन्दगी का पहला दिन होता है। फिर हम साल के शुरुआत को अलग अंदाज़ से क्यों देखते हैं ? नया साल। नए संकल्प। कितने दिनों के लिए ? मैंने भी संकल्प किया है इस नए साल पर। पेश करता हूँ आपके लिए।
जो बीत गई सो बात गई। अकसर मैं सोचता था कि पिछले साल अगर मैंने ऐसा किया होता या कोई घटना किसी और तरह से होती तो शायद बेहतर होता। यह सोचना कोई मतलब नहीं रखता है। इस नए साल में अतीत पर सोचने का समय बर्बाद नहीं करूँगा। क्योंकि अतीत को मैं बदल नहीं सकता हूँ। यह है मेरा पहला संकल्प। 
हर किसी का ज़िन्दगी का सफर अपना होता है। दूसरों की सफलता पर हम ईर्ष्या करते हैं। कभी दूसरों की कठिनाईओं के समय ऊपर वाले को अपने लिए धन्यवाद नहीं देते हैं। खुद कठिनाई में होते हैं तो अपने भाग्य को कोसते हैं। यह नहीं अनुभव करते हैं कि अन्य लोग हमसे कितना ज़्यादा और गंभीर कठिनाई का सामना कर रहे होंगे। अपनी ज़िन्दगी खुद को जीना है। मंजिल अपना मुझे तय करना है। और मंजिल तक पहुँचने का सफर मुझे खुद ढूढ़ना है। सबसे महत्वपूर्ण चिंता है कि इस सफर आनंद लेने की जिम्मेवारी मेरी है ,किसी और की नहीं। यह है मेरा दूसरा संकल्प। 
समय के साथ ज़िन्दगी बेहतर होती जाती है। ज़िन्दगी में उतार चराओ होता ही रहेगा। इस पर किसी का कोई कण्ट्रोल नहीं है। ऐसा कोई इंसान नहीं है जिसके ज़िन्दगी में असुविधा या कठिनाई ना हुई हो। विजेता वही है जो कि कठिन समय को दिमाग के साथ मुस्कुरा कर सामना करता है। अंग्रेजी में एक कहावत है -tough times do not last ;tough people do -कठिन समय सदा नहीं बरक़रार रहता है ; कठिनाई से जूझने वाले इंसान बरक़रार रहते हैं। मेरे काम के छेत्र में २०१७ एक कठिन साल रहा है। मैं अपने टीम को केवल एक ही दिशा की ओर प्रभावित कर रहा हूँ कि इस कठिन वक़्त को एक opportunity के अंदाज़ से देखो। निराश होने पर समय बेहतर नहीं बन जाएगा। कठिनाई कम नहीं हो जाएगी। टीम और खुद को ऐसी परिस्थितिओं से बेहतर जूझने के लिए तैयार करूँगा। 
समय और जीवन के इस सफर में लोग मेरे विषय में कुछ सोचेंगे ,बोलेंगे ,अपना विचार व्यक्त करेंगे। इस पर मेरा कोई कण्ट्रोल नहीं है। "कुछ तो लोग कहेंगे ,लोगों का काम है कहना "-अमर प्रेम का अमर गाना। छोड़ो बेकार की बातों में बीत ना जाए रैना। ऐसा कुछ नहीं करना है जिससे लोग आपके विषय ऐसा ना सोचे जो कि आप नहीं चाहते हो। आप लोगों के सोच को रोक नहीं सकते हो। क्या लोग सोच रहे हैं मेरे विषय में इस पर चिंता और समय बिताने का कोई मतलब ही नहीं होता है। सफलता और असफलता दोनों पर लोगों का मंतव्य है और रहेगा। मुझे इस साल इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यही है मेरा नए साल का एक और संकल्प। 
अंतिम संकल्प मेरे लिए ज़िन्दगी का एक दर्शन है। खेल तब तक जारी है जब आखरी गेंद नहीं फेका गया है। हम तब तक सफल होने का संभावना रखते हैं जब तक हम हाल नहीं छोड़ देते हैं। प्रयास हमारे हाथ में है। परिणाम नहीं। तब तक मैदान नहीं छोड़ना है जब तक संभावना है। तब तक हम असफल नहीं हुए हैं। ऐसा ही चल रहा है मेरे व्यवसाय में। देखता हूँ मैं इस संकल्प के जरिए सफल हो पाता हूँ या नहीं। 
क्या आप सहमत हो मुझसे ?अपना ख्याल व्यक्त करो फेसबुक के माध्यम से। मैं आपसे रोज फेसबुक पर वार्तालाप करूँगा। यह है मेरे नए साल का सबसे महत्वपूर्ण संकल्प। आपके साथ नए साल में नया रिश्ता बनाने का। प्रार्थना करता हूँ कि आपका , मेरा ,सबका ,२०१८ अब तक ज़िन्दगी का सबसे बेहतरीन साल हो। उम्मीद पे ही जीवन और ज़िन्दगी निर्भर है। 

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

नमस्कार। सर्दियों का मौसम कैसा बीत रहा है। कुछ लोगों को मजा आ रहा है। कुछ के लिए ठंडा ज़्यादा है। ठंडे के मौसम में गर्मियों की याद आती है ,और गर्मी के समय हमे सर्दियों का इंतेज़ार रहता है। यही ज़िन्दगी का सबसे कठिन पहलु है -हम सदा वही चाहते हैं जो नहीं है और उदास हो जाते हैं। जैसा की पिछले कई महीने में मैंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बेन -शहर के लेख का जिक्र किया था जिसमे उन्होंने हमें खुशियाँ बढ़ाने के विषय में बताया था ;उसी सिलसिले को बरक़रार रखते हुए मैंने एक मित्र से व्हाट्स एप्प के माध्यम से मिला एक और लेख को पेश करूँगा जो कि दो भाई के एक गज़ब कहानी को पेश करता है।
इस लेख के लेखक हैं नताली वाल्तेरस जिन्होंने दो भाई -बर्ट और जॉन जेकब्स -की आत्मकहानी को एक छोटे से लेख में पेश किया है। इन दोनों भाई ने मिलकर एक १०० करोड़ की टी -शर्ट बनाने वाली कंपनी बनाई है जिसका नाम है -life is good -जिंदगी अच्छा है। सच में अगर आप गौर करें जिंदगी अच्छा है। केवल इस चिंता की जिम्मेवारी अपनी है। अगर हम सोचे जिंदगी अच्छी है। तो वह अच्छी है। नहीं तो सर्दियों में हम गर्मी मांगते रहेंगे और गर्मियों में सर्दी।
कैसे इन दोनों भाई ने life is good के बारे में सोचा ? इनका जन्म अमेरिका के एक गरीब परिवार में हुआ। ६ बच्चों में ये दोनों सबसे छोटे थे। बचपन में इनके माता -पिता का एक मोटर दुर्घटना में काफी चोट लगी। माँ के कई हड्डियाँ टूट गई और पिता ने अपना दहना हाथ खो दिया। पिताजी अपने हाथ को खोने के बाद बहुत ही चिरचिरे और गुस्से वाले हो गए। बात -बात पर गुस्सा होने लगे और ज़िन्दगी को अनिश्चयता के साथ जीने लगे। काफी कठिन परिस्थितियों के साथ इस परिवार को जूझना पड़ा। इस माहौल में भी इनकी माँ ने अपना विश्वास बरक़रार रखा कि ज़िन्दगी अच्छी है। हर रात डिनर के वक़्त हर बच्चे को यह बताना था कि उस दिन अच्छा क्या हुआ था। केवल इसी कारण दिन के अंत एक अदभुत पॉजिटिव एनर्जी का एहसास होता था -पुरे परिवार को। जॉन का मानना है कि यह दैनिक सिलसिला उनको एक पीड़ित इंसान की तरह महसूस करने से रोकता था -"आज यह नहीं हुआ ,यह नहीं मिला ,यह कठनाई हुई आज "-इन सब चिंता दूर हो जाते थे अपने रात में डिनर टेबल पर। जब कुछ भी नहीं था ,पूरी परिवार के पास उम्मीदें जरूर मौजूद थी।
उनकी माँ ने उन्हें कभी मायूस नहीं होने दिया। रसोई घर में खाना बनाते वक़्त गाना गाना ;बच्चोँ के साथ उनके पढाई को अभिनय के जरिए समझाना ;उनके साथ कविताएँ दोहराना -चाहे परिस्थिति कितना ही प्रतिकूल क्यों ना हो ने बच्चों को एक ज़बरदस्त सीख दिया -खुश रहना परिस्थितयों पर निर्भर नहीं करता है। "माँ ने कठिन समय को उम्मीद के साथ सामना करने को सिखाया। क्योंकि ज़िन्दगी अच्छा है। "
इसी अटूट विश्वास को दोनों भाई ने अपनी ज़िन्दगी का और बिज़नेस का मकसद बना लिया है। उनका कहना है कि उम्मीद ही जीने का सबसे शक्तिशाली सोच है। उनका मानना है कि ज़िन्दगी परफेक्ट नहीं है। ना ही ज़िन्दगी आसान है। परन्तु ज़िन्दगी अच्छा है।
जैसा कि उनकी माँ उनसे दिन में हुए अच्छे घटनाओं का ज़िक्र करवाती थी ; दोनों भाई भी अपने कर्मचारियों को मिलते वक़्त एक ही अनुरोध करते हैं -कुछ ऐसा बताओ जो की अच्छा हुआ है। इस सोच का परिणाम बेहतरीन है। "इसके कारन अच्छे विचार सामने आते हैं ;इन विचारों के जरिए प्रगति होती है ;प्रगति ही सफलता की नीव है ;और पूरी कम्पनी का फोकस सफलता पर है ना कि कठिनाईओं पर। "यही विश्वास है दोनों भाई का।
ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत है ,क्योंकि आप एक अच्छे इंसान हो। यह मेरा विश्वास है। मिलेंगे नए साल। नया साल और आनंदमय हो। यही उम्मीद पर भरोसा रखता हूँ। और धन्यवाद करता हूँ मेरे दोस्त पीटर चित्तरंजन को इस तरह के प्रभावशाली लेख को शेयर करने के लिए।
क्या आप सहमत हैं दोनों भाई के विश्वास से ?जरूर अपना सोच ज़ाहिर कीजिए ,मेरे साथ ,फेसबुक के माध्यम से। उम्मीद रखता हूँ ,आप पर। 
नमस्कार। आशा है कि त्योहारों का मौसम अच्छा रहा आपके और अपनों के लिए। पिछले दो लेख में मैंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बेन -शहर के सलाह का ज़िक्र किया है जिन्होंने ज़िन्दगी से और खुश होने के १४  सलाह दिए हैं। इस लेख में अंतिम चार सलाह का ज़िक्र करूँगा। उन पाठकों के लिए ,जिन्होंने पिछला दो लेख ना पढ़ा हो ,मैं प्रोफेसर का प्रथम दस  सलाह को पेश कर रहा हूँ।
आपके पास जो भी है उसके लिए ईश्वर का शुक्रगुज़ार रहो। शारीरिक एक्सरसाइज रोज जरूरी है। दिन का सबसे महत्वपूर्ण है ब्रेकफास्ट। assertive बनना सीखें। अभिज्ञता अर्जन करने के लिए पैसे निवेश करना आवश्यक है। कठिनाई को नज़र अंदाज़ ना करके जल्द से जल्द सामना करें -जितनी देर कीजिएगा उतनी तकलीफ होगी। अपने आस पास अपने खुशियों के समय का वातावरण तैयार कीजिए। अन्य लोगों के साथ अच्छे से पेश आईये और मुस्कुराइए। जूते ऐसा पहनिए ताकि आपके पैरों में दर्द ना हो ,अन्यथा आपके मूड पर बुरा प्रभाव रहेगा। रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। आपको खुद पर ज़्यादा कॉन्फिडेंस मिलेगा। लोग आप पर ज़्यादा भरोसा करेंगे।
पेश है अंतिम चार सलाह। संगीत हमारी ज़िन्दगी का अहम् हिस्सा है। आप ऐसा किसी को जानते हो जो कि संगीत से नफरत करता है ? मैं मिला हूँ कुछ लोगों से जो कि संगीत से नफरत नहीं करता है लेकिन जिनमे संगीत का आनंद लेने का कोई दिलचस्पी नहीं है। शत प्रतिशत ऐसे लोग जिनसे मैं मिला हूँ अपनी ज़िन्दगी से दुखी हैं और उनको किसी चीज़ से ख़ुशी नहीं मिलती है। विज्ञानं कहता है कि गाना सुनते वक़्त हम अक्सर अपने साथ गुनगुनाते हैं। इस अपने आप के साथ गुनगुनाना एक अलग आनंद का अनुभव दिलाता है। संगीत दोस्त बनाने में भी बहुत मदत करता है। आप अकसर उन अजनबी से ज़्यादा करीब बन जाते हैं जिनका संगीत का चॉइस आपसे मिलता जुलता है। इसका तात्पर्य यह नहीं होता कि अगर मेरा म्यूजिक का टेस्ट आपसे अलग हो तो हमारी दोस्ती हो नहीं सकती। मेरा तो मानना है कि हम जितना अलग -अलग घराने का संगीत का आनंद उठा सकेंगे ,उतनी ही हमारी ज़िन्दगी में नएपन का अहसास होगा जो कि हमें और भी आनंद देगा।
आपका मूड आप क्या खातें हैं उस पर निर्भर करता है। हर तीन -चार घण्टे में थोड़ा -थोड़ा खाना लीजिए। इससे आपका ग्लूकोज़ लेवल बरक़रार रहेगा जो कि आपके मूड को ठीक रखेगा। मैदा और चीनी का कम इस्तेमाल कीजिए। यह भी ग्लूकोज़ बढ़ा देता है। ऐसा खाना लीजिए जो स्वास्थ के लिए फायदेमंद है। सब कुछ खाइये लेकिन संयम के साथ। तरह -तरह का खाना खाइये ताकि आप खाने से बोर ना हो जाए। ना बोर होना आनंद का कारन है।
खुद का ख्याल रखिए और अपने आप को अट्रैक्टिव महसूस कीजिये। रिसर्च के अनुसार ७० प्रतिशत लोग जो खुद में दिलचस्पी लेते हैं और अपने आप को आकर्षणीय मानते और महसूस करते हैं ; जिंदगी में खुश दिखते हैं। आकर्षणीयता के साथ आपके रूप का संबंध नही है। यह एक मानसिक स्टेट है। अगर आप गूगल के माध्यम से मेरी तसवीर को देखेंगे , तो आपको एक साधारण इंसान दिखेगा। परन्तु अगर आप मेरे चेहरे पर गौर कीजिएगा तो मुझमे एक कॉन्फिडेंस नज़र आएगा जो मेरा आकर्षण का कारन है। हम चेहरे के साथ जन्म लेते हैं ,लेकिन अपने चेहरे का प्रयोग हम पर निर्भर करता है।
अंत में ईश्वर पर विश्वास रखिए। उनके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है। खुशियाँ एक रिमोट कण्ट्रोल के तरह है। हर बार हम खुशियां खो देते हैं ,हम उसे ढ़ूढ़ने में पागल हो जाते हैं। कई बार ऐसा होता है हमें यही पता नहीं होता है कि हम खुद खुशियों पर विराजमान है लेकिन ख़ुशी ढूंढ रहे हैं। ऐसा हुया है कभी आपके साथ ? कब होता है ऐसा ?जब हम अपनी ख़ुशी को नज़र अंदाज़ करके दूसरों की ख़ुशी पर ईर्ष्या करते हैं। दूर का घास हमेशा ज़्यादा हरा दिखता है।
धन्यवाद प्रोफेसर बेन -शहर , हमारे ज़िन्दगी को और ख़ुशी के साथ जीने में मदत करने के लिए। आप खुश रहे और दूसरों को ख़ुशी से रहने दें। अगर आप मेरे साथ फेसबुक के माध्यम से मुलाकात करेंगे तो हमें बेहद ख़ुशी होगी। इंतेज़ार करूंगा।