शुक्रवार, 30 जून 2017

क्रिकेट का चैंपियंस ट्रॉफी तो आप जरूर देख रहे होंगे। क्या यह आपके समय का सबसे बेहतर उपयोग है ? इस प्रश्न का जवाब सीधा और सरल नहीं है। अगर आपको क्रिकेट में ऐसी दिलचस्पी है कि आप और किसी काम पर कंसन्ट्रेट नहीं कर पाते हैं तो आपको क्रिकेट जरूर देखना चाहिए। परंतु उसके तुरंत बाद आपको अपना काम निपटा लेना चाहिए। कई साल पहले मैं किसी बड़ी कमपनी का जेनरल मैनेजर हुआ करता था। उस वक़्त मेरे टीम को छूट थी कि वह किसी भी एक दिवसीय क्रिकेट मैच में जहाँ भारतीय टीम खेल रही हैं , अंतिम के पाँच ओवर को टीवी पर देख सकता था। लेकिन मैच के ख़त्म होने के बाद विश्लेषण के लिए केवल दस मिनट का समय उपलब्ध था। उसके बाद काम पे लौटना है और काम ख़त्म करना जरूरी है।
आज मैं आपको अपने समय का बेहतर सदुपयोग के लिए शेष पाँच टिप्स का जिक्र करूंगा। जैसा मैंने वादा किया था आप से मेरे पिछले महीने के लेख में। अगर आप में से कोई पहली बार मुझसे मिल रहें हैं Doc -U -Mantra के माध्यम से और इस लेख से प्रभावित हो कर पिछले लेखों को पढ़ना चाहते हैं तो inextlive पर log in कीजिए। हर महीने के पहले सोमवार में आपको Doc -U -Mantra मिल जाएगा। सब पाठकों से निवेदन है आपकी फरमाइश का -आप किस विषय में मुझसे जानना चाहते हैं। फेसबुक के माध्यम से मुझे बताईए। आप संपादक को चिट्ठी के माध्यम से भी अपनी फरमाइश का जिक्र कर सकते हैं।
आपके समय का बेहतरीन उपयोग के लिए मेरा छठा सलाह है -दूसरों से काम लीजिये जब जरूरी हो। अंग्रेजी में इसे delegation कहते हैं। डेलीगेशन करते वक़्त आपको ख्याल रखना पड़ेगा कि आपने सही व्यक्ति को सही काम सही समय पर डेलिगेट किया है। डेलीगेशन का तात्पर्य है कि उस काम को सठिक करने की जिम्मेवारी आपकी है ,लेकिन काम कोई दूसरा करेगा। इसका मतलब यह होता है कि आपको सोच लेना पड़ेगा कि आप किस तरह से निश्चित करोगे कि जिसको आपने काम करने को कहा है , वह उसी तरह से काम कर रहा है। एक अच्छा मैनेजर वही होता है जो सठिक डेलिगेट कर सकता है।
बाद में करेंगे। कितनी बार आप कई काम को सही वक़्त पर नहीं करते हो। जरा सोचिए 'बाद में करेंगे' निर्णय तक पहुँचने के लिए आपको उस काम के जरूरत को समझना पड़ेगा। बाद में जब उस काम को करने जाइएगा , आपको दोबारा उस काम को समझना पड़ेगा। जिसके लिए आपको फिर समय देना पड़ेगा। किसी भी काम को अगर आपको इस वक़्त नहीं करना है ; तय कीजिए कि आप उस काम को किसीको डेलिगेट कर सकते हैं या नहीं। अगर आप डेलिगेट नहीं कर सकते हैं और उसी वक़्त आपके पास समय नहीं है तो आप ऐसा कीजिए कि उस काम को इतनी जल्दी कीजिए ताकि आपको काम को फिर से ज्यादा समय ना गुजारना पड़े। मैं जब जेनेरल मैनेजर की हैसियत में काम करता था तो ऑफिस के अन्य लोग मेरे चटपट डिसिशन का बहुत सराहना करते थे। मैं केवल अपने समय का बेहतर उपयोग कर रहा था। मैं किसी भी कागज़ जो कि मेरे मेज पर पहुचँता था ; उस कागज़ को मैं केवल एक ही बार पढ़कर निर्णय लेता था कि उसका करना क्या है ! यह मेरे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है।  करके देखिये आप कितना समय बचा सकोगे।
हिन्दी फिल्म के हीरो कई काम एक साथ बखुबी कर सकते हैं। याद रखिएगा यह फिल्मों में ही संभव है। आम ज़िन्दगी में नहीं। multi -tasking हर किसीके लिए संभव नहीं है। कुछ लोग कर सकते हैं ;वह भी कुछ हद तक। परन्तु कई लोग काबिल ना होने के बावजूत मल्टी टास्किंग करने का प्रयत्न करते हैं। करते वक़्त गलतियां करते हैं। जिसको सुधारने के लिए फिर समय चाहिए। अगर गलती भी नहीं करते हैं ; वह यह नहीं समझते हैं कि मल्टी टास्किंग करने के कारन कुल समय ज्यादा लगता है। अपना उदाहरण देता हूँ। किसी लेख में मैंने ज़िक्र किया था कि मैंने अपने आप को इस लेख को लिखने के लिए दो घण्टे का समय निर्धारित किया है। मैं दो घण्टे में यह लेख तभी ख़त्म कर सकता हूँ जब कि मैं लगातार दो घण्टे का समय इस लेख को लिखने में प्रयोग करूँ। सोचिए मैंने आधा घंटा लिखा ; कुछ और काम किया ; फिर वापस लेख लिखने बैठता हूँ ; मुझे दुबारा लिखने के मानसिक स्तिथि में खुद को लाना पड़ेगा।
कुछ लोग खुद काम नहीं करते हैं ; दूसरों को भी काम नहीं करने देते हैं।  ऐसे लोगों से सावधान रहिएगा।  इनको अपने समय के मूल्य का अंदाज़ नहीं है। इस तरह के टाइम वेस्टर्स के विषय में सचेतन रहिए। यह आपके समय को खा जाता है लेकिन आप समझ नहीं पाते हो। व्हॉट्स ऑप पर आप जो चैट करते हो ; इसी तरह का एक टाइम वेस्टर है जो कि आपका समय खा जाता है परन्तु आप समझ नहीं पाते हैं। मैं आजकल देखता हूँ कि लोग सफर के वक़्त अपने मोबाइल पर ही समय बिताते हैं।  आस पास क्या हो रहा है कुछ खबर नहीं है।  दुनिया पर नजर नहीं रखेंगे तो आप आगे बढ़िएगा कैसे ?
अंतिम सलाह -स्वस्थ रहिए। अस्वस्थ वक़्ति को किसी भी काम को करने में ज्यादा समय लगता है। समय निकालिए शारीरिक और मानसिक स्वस्थ को चंगा रखने के लिए। यह जिंदगी जीने का सबसे महत्वपूर्ण कदम है।  समय नहीं मिल रहा है आपको अपने स्वास्थ के ख्याल रखने का ?
तब आपको इस लेख में और पिछले लेख में ज़िक्र किए हुए टिप्स का प्रयोग करना जरूरी है। तभी आपको समय मिलेगा अपने सेहत का ख्याल रखने के लिए। जिसके बिना आपका समय का प्रयोग सही नहीं होगा।
मैं इंतेज़ार करूँगा आपसे सुनने के लिए। आपके समय के सदुपयोग के विषय में और आपके स्वस्थ जिंदगी का। खुश रहिए।  इसका कोई विकल्प नहीं है। 

शनिवार, 29 अप्रैल 2017

अभी ना जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं। कुछ पल समय को रोक देते हैं। कुछ आपके चाहने पर भी गुजरते नहीं। यही मजा है समय का। नमस्कार। कैसा बीत रहा है आपका समय ? चौबीस घण्टे कभी नहीं बदलेंगे। आपके मानसिक स्थिति निर्धारण करेगी आप समय को रोकना चाहते हो या समाप्त।
पिछले कुछ महीनों से मैं समय आपका और उसके बेहतर प्रयोग के विषय में चर्चा कर रहा हूँ। आज और अगले महीने की चर्चा में इस चर्चे को समाप्त करूँगा। दस टिप्स के साथ जिसके मदत  से अपने समय के बेहतर उपयोग में आपको लाभ होगा।
मैनेजमेंट के प्रसिद्द गुरु ने एक बहुत सहज बात का एहसास दिलाया था -what you cannot measure you cannot improve -जो आप माप नहीं सकते हो ,उसे आप सुधार नहीं सकते हो। आपका समय आप किस तरह से बिता रहे हो अगर आप नहीं समझ पाओगे तो सुधार कैसे लाओगे। मैं हर दिन के अंत में एक डायरी में अपने समय के प्रयोग को लिख डालता हूँ। हर सोमवार को पिछले हफ्ते के समय के प्रयोग का विश्लेषण करता हूँ। कितना समय लगता है मुझे रोज अपने डायरी में लिखने के लिए ? एक या दो मिनट। और कितना समय लगता है हर सोमवार विश्लेषण करने में और उसके अनुसार उस हफ्ते का प्लानिंग करने में ? मुश्किल से पांच मिनट। क्या आप इतना सा समय निकाल पाएँगे खुद को ज़िन्दगी में और आगे बढ़ाने के लिए ? याद है हमने पिछले किसी लेख में उल्लेख किया था कि हमसे कहीं अधिक सफल इंसान के पास उतना ही समय है जितना अपने पास। केवल उन्होंने अपने समय का सदूपयोग बेहतर किया है। शायद हम और आप अपने समय का बेहतर सदुपयोग करके प्रसिद्ध ना बन पाएँगे। लेकिन अधिक सफल जरूर बन सकते हैं। क्या आप अपने समय के मूल्यांकन की शुरुआत आज ,अभी शुरू करेंगे ? महीने की पहली तारीख है आज। शायद इतना अच्छा मौका जलदी नहीं मिलेगा।
हफ्ते के प्लान में मैं क्या करता हूँ ? यह तय करता हूँ कि इस हफ्ते मुझे क्या हासिल करना है ?उसकी एक लिस्ट बनाता हूँ। लिस्ट में लिखे हुए हर काम को करने में कितना समय दूँगा उसका निर्धारण करता हूँ। इस विषय में मैंने इसके पहले भी लिखा था। यह प्रथा मैंने कुछ महीनो पहले सीखा है और प्रयोग किया है। इससे मुझे बेहद फायदा हुआ है। इसके अलावा मैं कौन सा काम किस दिन करूँगा उसका चयन भी कर लेता हूँ। हफ्ते की शुरुआत में। मजे की बात यह है कि मेरे परिवार वाले भी इस बात को समझ गए हैं और पारिवारिक काम को भी इस लिस्ट में जोड़ देते हैं। मेरी बात मानिए इस प्लानिंग के कारण मुझे अपने व्यक्तिगत जीवन को  और बेहतर जीने में काफी मदत मिलता है।
लेकिन इतनी प्लांनिंग मैं याद कैसे रखता हूँ ? इसके लिए मुझे अपने बच्चोँ को धन्यवाद देना होगा। मैंने काफी दिनों तक एक अति साधारण मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल किया है। मेरा कहना था कि मोबाइल फ़ोन कॉल करने और sms भेजने के अलावा और किसी  जरूरत का नहीं है। मैं गलत था। बच्चों ने मुझे समझाया एक मोबाइल हैंडसेट मुझे मेरे समय के उपयोग में कितना फायदेमंद है। हर दिन का प्लानिंग ;महत्वपूर्ण काम के लिए आगाम एलर्ट ; आगे के काम को इसी वक़्त समय रेखा पर लिख डालना। मेरी ज़िन्दगी बदल गई है ,इस एहसास के बाद। धन्यवाद बच्चों। आपने हमें अपने समय को बेहतर मैनेज करने में एक नई दिशा दी है।
प्लैनिंग करते वक्त हम अकसर एक गलती कर डालते हैं। जितना सम्भव है उससे कहीं ज्यादा काम करने का प्रयत्न करते हैं। इसका फल है कि हम संभाल नहीं सकते हैं और हाल छोड़ देते हैं। फिर हमारा पूरा प्रयास विफल हो जाता है और आगे हम कोशिश नहीं करते हैं। प्लैनिंग करते वक़्त मैं पाँच का फॉर्मूला प्रयोग करता हूँ। पाँच चीजें जिस पर मैं कुछ समय के लिए अपना ९५ प्रतिशत फोकस दूँगा। कितने दिनों में इन पाँच काम को निपटाऊंगा यह भी तय कर लेता हूँ। एक उदाहरण स्वरुप मैं इस हफ्ते का अपना प्लैनिंग पेश कर रहा हूँ आपके लिए। इस हफ्ते में मुझे ८ काम को हासिल करना है। इन आठ काम में तीन काम मुझे मंगलवार यानि कल तक ख़त्म करना पड़ेगा। आज और कल मैं अपना ७५ प्रतिशत समय इन दो काम को समाप्त करने के लिए प्रयोग करूँगा। बीस प्रतिशत समय और तीन काम जो कि प्रायोरिटी में इन दो काम के ठीक बाद आएगा उन पर प्रयोग करूँगा।
आज का आखरी टिप। आप कितना भी प्लॉन कर लो अक्सर परिस्थितियाँ आपको कुछ और करने पर मजबूर कर देती हैं। करने चले थे कुछ ,करना पड़ा और कुछ। विचलित मत हो जाईए। ज़िन्दगी में यह एडजस्टमेंट सदा चलता रहेगा। यह ज़िन्दगी का एक अभिन्न अंग है। गंतव्य तक पहुँचने के सफर में ऐसे मोड़ और उतार चढ़ाओ रहेगा ही। वही सफल होता है जो तुरंत अपना गति और जरूरत होने पर पथ बदलने का सठीक निर्णय समय पर लेता है। रास्ता से उतर कर पगडण्डी पर थोड़ी देर शायद चलना परे वापस रास्ता पर आने के लिए।
यह पाँच का फॉर्मूला मैंने अजानते हुए अपने इस लेख में भी कर डाला। आपके साथ आज दस में पाँच टिप्स पेश करके। सहज बात याद रखिएगा। हमारे हाथ के पाँच उँगलियाँ हैं। और वही हमारे कण्ट्रोल में रहता है जिस पर हम अपना मुठ्ठी बांध सकते हैं। क्या आप अपने समय को अपने मुठ्ठी में ले चुके हैं ? नहीं ? तो कोशिश जरूर कीजिए। ज़िन्दगी का आनन्द कहीं एक अलग ,ऊँचे पायदान पर ले जा सकिएगा।
गर्मी और बढ़ेगी। अपना और अपनों के सेहत का ख्याल रखिएगा। अगले महीने आखिर और दसवां टिप सेहत के विषय पर है। तब तक खुश रहिए और ज़िन्दगी का आनंद लीजिए। 

सोमवार, 24 अप्रैल 2017

गर्मी का मौसम द्वार पे खड़ा है। दिन लंबे होते जा रहें हैं। रात छोटा। मज़े की बात यह है कि हम सब शाम का इंतज़ार करते हैं ताकि गर्मी से थोड़ा राहत मिले। आपके दिन लंबे होने के कारण क्या आप ज़िन्दगी से ज़्यादा हासिल कर पा रहें हैं ? पिछले महीने मैंने अपने समय का सदुपयोग करने का ज़िक्र किया था। आज उस चर्चे को आगे ले जाना चाहता हूँ।
अगर हम अपने समय के उपयोग का विश्लेषण करें तो यह महसूस कीजिएगा की आप urgent यानि जिस काम को 'अभी 'करना है या important अर्थार्त 'जरूरी 'काम करते हैं। हम सोचते हैं कि हम अर्जेंट या इम्पोर्टेन्ट काम करते हैं , ऐसा नहीं है। जरा सोचिये। मौका मिलते ही व्हाट्स ऑप चेक करते हैं। यह अर्जेंट है या इम्पोर्टेन्ट ? कितना समय बिताते हैं आप सोशल मीडिया पर ?क्या मिलता हैं आपको ? लाइक्स। एक रिसर्च में मैंने पढ़ा है की आज कल के युवा अपने स्मार्ट फ़ोन पर प्रतिदिन 169 मिनट बिताते हैं। आप कितना समय बिताते हैं अपने फ़ोन पर ? मै तो देखता हूँ कि आज के युवा का सर हर वक़्त झुका रहता है -शर्म के कारण नहीं, फ़ोन के कारण। ट्रेन ,बस या कार में सफर करते वक़्त आज के युवा इस फ़ोन के कारण बाहर के दृश्य को मिस कर जाते हैं।
अगर आप को अपने समय का बेहतर उपयोग करने का इरादा है ,ज़िन्दगी से अधिक पाने के लिए , आपको अपने काम को चार बक्सों में विभाजित करना पड़ेगा। 
  1. अर्जेंट और इम्पोर्टेन्ट 
  2. नॉट अर्जेंट लेकिन इम्पोर्टेन्ट 
  3. नॉट इम्पोर्टेन्ट लेकिन अर्जेंट 
  4. नॉट अर्जेंट और नॉट इम्पोर्टेन्ट 
रिसर्च कहता है  की ज़्यादा लोग ऊपर लिखे विभाजन के अनुसार सबसे कम समय दो नंबर यानि नॉट अर्जेंट लेकिन इम्पोर्टेन्ट काम को देते हैं। परंतु यही किसी भी इंसान के उन्नति और तरक्की के लिए सबसे जरूरी है। उदाहरण है ट्रेनिंग या प्रशिक्षण के समय निकालना ही खुद को आगे बढ़ने के लिए। जो लोग नौकरी करते हैं इस ट्रेनिंग के लिए समय निकाल नहीं पाते हैं हर काम को अर्जेंट सोच कर।
अगर आप हर वक़्त अर्जेंट और इम्पोर्टेन्ट काम में उलझे रहोगे तब का ज़िन्दगी क्राइसिस से गुजर रहा है। आपके पास समय नहीं है खुद की तरक्की के लिए समय निवेश करने का। दूसरी बात इसके कारण आप थक जाओगे ;ज़िन्दगी से कम आनंद ले पाओगे और शीघ्र बर्न आउट हो जाओगे।
तीसरा बक्सा सबसे खतरनाक बक्सा है -नॉट इम्पोर्टेन्ट लेकिन अर्जेंट -इसी बक्से के कारण इंसान सबसे ज्यादा धोका खा जाता है। अर्जेंसी का निर्णय बहुत समय गलत हो जाता है। नतीजा यह होता है कि हम नॉट इम्पोर्टेन्ट काम पर समय गुजार देते हैं अर्जेंसी के लिए और फिर एहसास होता है कि इम्पोर्टेन्ट काम के लिए या तो समय कम है या समय है ही नही।
चौथा बक्सा समय की बरबादी है -नॉट अर्जेंट और नॉट इम्पोर्टेन्ट वाला बक्सा -सोशल मीडिया में गुजारा हुआ अत्यधिक समय इस बकसे में आता है। क्या आपका ज़िन्दगी फेसबुक और व्हाट्स एप्प पर निर्भर करता है। देख लीजिए यही सबसे बेहतरीन उपाय है आपके लिए या नहीं।
सफलता का फार्मूला क्या है ?चौथे बकसे में दस प्रतिशत से अधिक समय मत बिताइए। तीसरे बकसे से सावधान रहिए। पहले और तीसरे बकसे में कभी -कभी निर्णय गलत हो जाता है। कोशिश कीजिए की तीसरे बकसे में बीस प्रतिशत से ज्यादा समय ना गुजारे।
प्रथम बकसे में चालीस से पचास प्रतिशत समय गुजारिए। ज़्यादा नहीं। इससे ज्यादा अगर आपको इस बक्सा में समय गुजारना परे तो आप कहीं गलती कर रहे हो अपने काम के चयन पर।
दुसरे बकसे में आप जितना अधिक समय दोगे -कम से कम पचीस से तीस प्रतिशत -उतना ही आपको सुविधा होगी अपने तरक्की के लिए।
कैसा लगा आज आपको ?कोशिश कीजिए। देखिएगा आपका ज़िन्दगी में सुधार। आनंद लीजिए ज़िन्दगी का। अपने बहुमूल्य सुझाव के साथ मुझसे मिलिए फेसबुक के माध्यम से। यह समय आपके लिए और मेरे लिए दूसरे बकसे का समय है। खुश रहिए। 

शुक्रवार, 31 मार्च 2017

नमस्कार। आपका समय कैसा बीत रहा है इस साल ? अक्सर हम लोगों से इस तरह का प्रश्न करते हैं। सही में समय अपने आप बीत जाता है। रुकता नहीं है किसी के लिए। ना ही किसी का इंतज़ार करता है। अच्छा समय समझने के पहले गुज़र जाता है ;बुरा गुजरने का नाम ही नहीं लेता है।
समय एकमात्र बहुमूल्य सम्पद है जो की हर इंसान के पास समान है -दिन के २४ घंटे। इसका सदुपयोग ही हम सबको एक दूसरे से अलग करता है। जिन सफल इंसानो की हम पूजा करते हैं ,उनके पास भी दिन के चौबीस घंटे हैं -आपके पास ,मेरे पास भी। 
आपने शायद यह भी महसूस किया होगा कि आप अपने आप जिस तरह से आज अपना २४ घंटे गुज़ार रहें हैं ; वह पिछले पॉँच साल में कितना बदल चुका है। बदलेगा ही क्योंकि दुनिया बदल रही है। समय बदल रहा है। सोच बदल रहे हैं। और ज़िन्दगी के प्रति हमरा अंदाज़ बदल रहा है। इस द्रुत बदलते हुए समय केवल हमारे हर किसीके दिन का २४ घंटे उतने के उतने ही हैं और रहेंगे भी। हर कोई अपने पास समय के अभाव को महसूस जरूर कर रहा है। क्या आप हमसे सहमत हैं ?
अक्सर मुझे कई लोगों ने उन्हें टाइम मैनेजमेंट सीखाने का ज़िक्र किया है। मैं उनको सहज भाषा में यह समझाता हूँ कि Time cannot be managed . We have to manage ourselves to manage time better इसका तात्पर्य यह है कि समय को मैनेज करने का प्रयास वृथा है -घड़ी का कांटा किसी के लिए रुकता नहीं है। हम खुद को और हम क्या कर रहे हैं उस पर हमारे समय का सदुपयोग निर्भर करता है। 
क्या आप ज़िन्दगी में कुछ ऐसे लोगों से मिले हैं जिन्हें हर वक़्त अपने लिए क्वालिटी समय रहता है ?ईर्ष्या होती है इन लोगों से ?इतना कुछ करते हैं ; इतने सफल हैं लेकिन फिर भी खुद के पास इतना समय है। क्या करते हैं ये लोग ?
  1. ऐसे लोग उसी काम को करने पर अपना समय बीताते हैं जो की उनकी जिम्मेवारी है। दूसरों का नहीं। इसका तात्पर्य यह होता है कि अपना और दूसरों का जिम्मेवारी के बारे में दोनों की समझ सही है। जैसे की एक मैनेजर को अपना काम पर समय बिताना चाहिए ना कि अपने सहयोगी के काम पर। इसके लिए  जरूरी है की मैनेजर और सहयोगी को एक दूसरे के काम के विषय में समझ ठीक हो। 
  2. कुछ लोग क्या करना है लिख कर रखते हैं -इसे 'To Do' लिस्ट कहा जाता है। लिस्ट तो सदियों से बनता आ रहा है। लेकिन लिस्ट का प्रयोग समय के साथ बदल रहा है क्या ?इस साल के शुरुआत से मैंने एक प्रयोग किया है इस विषय में जो कि मुझे काफी मदत कर रहा है। पहले इस लिस्ट में जो काम मुझे करना है उसके साथ उस काम को समाप्त करने के लिए अंदाज़ कितना समय लगना चाहिए यह मैं नहीं लिखता था। इसके कारण अक्सर मैं इस लिस्ट के किसी -किसी काम को करने में ज़रूरत से ज़्यादा समय दे डालता था जिसके कारण कई और काम को करने के लिए मेरे पास समय कम मिलता था। ज़ल्दबाज़ी में गलतियां ज़्यादा होती थी और क्वालिटी भी घट जाता था। इसी लेख के विषय में इसका एक उदाहरण पेश करता हूँ। जनवरी महीने से मैंने इस लेख को लिखने के लिए दो घंटे का समय निर्धारण किया है। दूसरा निर्णय इस विषय में यह है कि मैं सुबह इस लेख को लिखता हूँ चूँकि उस समय दिमाग सबसे अधिक चलता है और सोच जल्दी और बेहतर होता है। तब से मैं दो घंटे में यह लेख लिख डालता हूँ। 
  3. कुछ परिस्थितियां आपके नियंत्रण के बाहर होती हैं जो कि आपके समय को खा जाती है। काफी लोग इसके कारण विचलित हो जाते हैं और इसके कारण कुछ और समय बर्बाद करते हैं। कुछ फायदा नहीं होता है ,ज़िन्दगी में जिस पर आपका कोई नियंत्रण नहीं है, उस पर नियंत्रण करने का प्रयत्न ही समय का अपचय है। इस वक़्त ,यह लेख लिखते हूए हमारा इन्टरनेट अत्यधिक धीमे गति से चल रहा है जिसके कारण मुझे दुगना समय लग रहा है। दो घंटे पूरे हो चुके हैं मेरे लिए। इस धीमी गति के इन्टरनेट के वजह से आज और लिखना समय का सदुपयोग नहीं है। अगले महीने और कई तरीकों का ज़िक्र करूँगा , खुद को बेहतर मैनेज करने के लिए ताकि आपका खुद के  समय का प्रयोग में उन्नति आए। आखिर २४ घंटे का आनंद तो ज़्यादा लेना पड़ेगा। है ना ?
कैसा लगा मेरे इस नए साल का प्रयास। ज़रूर समय निकालिए मुझसे फेसबुक पर मिलने के लिए। इंतज़ार करूंगा। आपका और आपके समय का। मेरे लिए। खुश रहिए। 

शुक्रवार, 3 मार्च 2017

कैसा रहा जनवरी का महीना ? कुछ सोचा है आपने अपने विषय में ,इस नए साल के अवसर पर ? कोई संकल्प किया है तरक्की का ? मैंने किया है , अपने आप से। मैं इस साल के शुरू से अपने समय का बेहतर प्रयोग करने का कोशिश कर रहा हूँ। कुछ हद तक सफलता भी मिली है। काफी तरक्की करनी पड़ेगी ,अभी भी। अपने इस प्रयास के विषय में अगले महीने के इस लेख में लिखुंगा। इस बार ज़िक्र करना चाहता हूँ एक इंसान के संकल्प के विषय में। इस फिल्म ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। सोचने और सीखने में मजबूर किया है।
एक पिता का संकल्प अपने बेटी के माध्यम से देश के लिए स्वर्ण पदक। यह सत्य घटना पर आधारित है। मेरा प्रणाम उस पिता को ;उनके बेटियों को ; और जिसका भूमिका बहुत ही अहम् रहा है बेटियों की माँ को। हमने काफी कुछ सीखा है आप लोगों से जो की आज के कर्म जीवन में सफलता पाने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। धन्यवाद तहे दिल से। ग्रहण कीजियेगा और मेरे जैसे आम लोगों के लिए हर वक़्त एक मिसाल बन कर रहिएगा।
मैंने कई सारी बातें सीखी हैं। दस महत्वपूर्ण सीख का जिक्र करूँगा। आपने अगर और सीखा है ,फेसबुक के माध्यम से मुझे जरूर बताइएगा।

  1. डर पर विजय पाना होगा -कोई भी नए प्रयास के लिए अपने दिल से डर को निकाल फेकना होगा। 'कुछ तो लोग कहेंगे ,लोगो का काम है कहना '-चाहे दुनिया भी कहे आपको अपने विश्वास पर कायम रहना पड़ेगा। यह तब और जरूरत है , जब आप ऐसा कुछ प्रयास कर रहें है जो किसीने पहले कभी नहीं किया हो। जैसे बेटियों का कुश्ती के अखाड़े को अपनाना। 
  2. डिसिप्लिन -इसके बारे में मैंने पिछले कई लेखों में ज़िक्र किया है। डिसिप्लिन के बिना कोई सफलता नहीं मिल सकती है। इस फिल्म ने डिसिप्लिन का एक नया मापदंड दिया है -त्याग का। और लोगों से आगे रहने के लिए कई आराम और आनंद देने वाले चीज़ों की क़ुरबानी देनी पड़ेगी। आज हमारे भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान इसके सबसे उत्कृष्ट मिसाल हैं। 
  3. सही और गलत का सठीक निर्णय -बेटियों ने अपने पापा को समझाने के लिए काफी सारी कठिनाईयों का कारण पेश किया। स्कूल में अन्य बच्चो का टिप्पणी ;मोहल्ले में लोगों का पर हँसना ; लंबे बालों का अखाड़े का मिट्टी के कारण गंदा हो जाना। पापा ने और सब चीज़ों को नज़रंदाज़ किया। केवल बाल कटवा दिए। 
  4. कोई भी आपकी ज़िन्दगी में नई मोर ला सकता है -आपको सजग रहना पड़ेगा। सुनना पड़ेगा। याद है बेटियों की दोस्त की शादी ?यहाँ दो बेटियाँ परेशान थी अपने पापा के तानाशाही से; उनके कठीन संकल्प से बेटियों को सफल कुश्तीगीर बनाने का ; और नई नवेली दुल्हन दुखी थी क्योंकि उनके पापा ने केवल उनकी जल्दी शादी की ही प्रयास की थी। यही अहसास दोनों बेटीयों के जिंदगी का सबसे अहम् मोड़ बन गया। इसके बाद उनका संकल्प उनके पिता के संकल्प के साथ जुड़ गया। आपके जिंदगी में कोई ऐसा मोड़ आया है , अब तक ?
  5. गंतव्य के निर्धारण के साथ -साथ वहाँ तक पहुँचने का सफर भी तय कर लेना चाहिए -कई बाधाएं आयेंगी सफर के दौरान। निराशा इस सफर का एक अभिन्न अंग है। मंजिल तक वही पहुँचता है जो कि रास्ते में आए कठिनाई का हौसले के साथ सामना करता है ;गलतियों से सीखता है -मुर्झा नहीं जाता है और अपने विश्वास पर अटूट रहता है। संकल्प ही नाव को किनारे तक पहुँचाता है। 
  6. दूसरोँ का साथ जरूरी है -चाहे वह माँ का निस्वार्थ साथ हो या मुर्गी बेचने वाले का व्यवसायिक निर्णय। साथ वही निभाता है जो आपके काबिलियत पर विश्वास करता है। आपके सफलता से उसका क्या ताल्लुक है ?
  7. हट के सोचना जरूरी है -समाधान ढूढ़ने के लिए। गद्दा तो गद्दा ही होता है जी !ना मिल सके तो क्या हुआ -फ़ोन पर भी तो कोचिंग हो सकता है। ईरादा सठीक है तो समाधान जरूर मिल जाएगा। अलग सोच में अकसर समाधान छुपा रहता है। 
  8. जिनके पास क्षमता है उनसे दुशमनी लेने से कोई फायदा नहीं होता है -जिनके पास आपसे ज्यादा क्षमता है उनका अगर दिल चाहे तो आपके रास्ते का काँटा जरूर बन सकते हैं। आपके मंजिल तक पहुँचने के लिए ऐसा कुछ मत कीजिये जो कि आपको अपने मार्ग से भटका दे। ऐसा मेहनत बेकार है और आपको अपने मंजिल तक पहुँचने से वंचित कर सकता है। 
  9. निर्णय आपका ,जिम्मेवारी आपकी -अकसर जिंदगी में आपके चाहने वाले , आपके श्रद्धेय ऐसी सलाह देतें हैं जो कि एक दूसरे के विपरीत हैं। दोनों आपका भला और सफलता चाहते हैं। जैसे फिल्म में पिताजी और कोच में सोच अलग था। सलाह कोई भी दे सकता है। निर्णय आपको लेना होगा। और उस निर्णय के फलस्वरूप नतीजे की जिम्मेवारी आपकी होगी। 
  10. डूबते को तिनके का सहारा नहीं भी मिल सकता है -खुद को डूबने से बचाना पड़ेगा। हम इस दुनिया में अकेले आए हैं और हमें जिंदगी में सफलता पाने के लिए हर कठिनाई का सामना खुद करना पड़ेगा। अपने अंतिम शक्ति तक। पूरी ज़िद के साथ। नहीं तो हम सफर में आए हुए कठिनाईयों के नीचे दब जाएंगे। 
क्या आप मुझसे सहमत है ?फिल्म देखी है आपने ?अगर नहीं तो जरूर देखिए। ऐसी फिल्म कदाचित बनती है। क्या पता इस फिल्म के प्रभाव से आपका ज़िन्दगी एक नया मोड़ ले। चलिए ना ,ना चले हुए पथ पर। शायद आपने खुद को अब तक पूरी तरह पहचाना ना हो ! आपका इंतज़ार करूँगा फेसबुक पर। 

मंगलवार, 3 जनवरी 2017

नमस्कार। कैसा रहा आपका कल का दिन ?नए साल का पहला दिन। आशा है अच्छा रहा। आपको नए साल की बधाई। दुआ करता हूँ की हर किसी का 2017 मंगलमय हो। बेहतर हो।
2016 के शुरुआत में आपने क्या कोई नए साल का resolution या प्रतिज्ञा किया था ? कितने दिनों तक आपने सफलता के साथ अपने प्रतिज्ञा को निभाया ? कई लोग नए साल पर resolution करते हैं। मैं भी करता हूँ। शायद आप भी। क्यों करते हैं हम ?नया साल ,नई शुरुआत ? साल के बीच में क्यों नहीं करते हैं ? resolution को क्यों हम निभा नहीं पाते हैं ? आज कुछ बातें इसी विषय पर करेंगे।
resolution क्या है ? खुद में एक परिवर्तन जो कि फायदेमंद है अपने लिए। अपनों के लिए। धूम्रपान बंद करना ,वजन घटाना , काम के सिलसिले में नए तरीका अपनाना। करना  उतना आसान नहीं है जितना की सोचना। कहीं पर एक inertia रहता है परिवर्तन का। इस लिए हम साल में एक बार प्रतिज्ञा करते हैं। कोशिश जरूर करते हैं। लेकिन प्रतिज्ञा पर टिक नहीं पाते हैं। फिर क्या करतें हैं ? अगले साल का इंतेज़ार।
परिवर्तन के लिए ज़िद और तैयारी बहुत जरूरी है। परिवर्तन के  उपाय को हम आसानी से समझने और याद रखने के लिए हम ABCD of change के विषय में बात करेंगे। A -Accept , B- Believe, C- Commit, D- Do.
Accept -आपको यह स्वीकार करना पड़ेगा कि परिवर्तन आवश्यक है। बात यहाँ से शुरू होती है। मजबूर होने के पहले अपनी मर्जी से परिवर्तन लाने में ही मंगल है।
Believe -केवल स्वीकार करने से नहीं चलेगा। खुद पर विश्वास रखना पड़ेगा कि मैं यह परिवर्तन कर सकता हूँ। मेरे तजुर्बे में यहीं पर काफी लोग हार मान जाते हैं। हमें यह समझना है कि बदलाव दिमाग में पहले जरूरी है क्योंकि हमारा दिमाग यह निर्धारण करता है कि हम क्या करेंगे या नहीं करेंगे।
Commit -ज़िद वाली बात। खुद को बताना क्या नहीं करना है या करना है। धूम्रपान नहीं करना है या सुबह का वाक करना है। मैंने कुछ लोगों को देखा है कि कम सिगरेट पिऊंगा। इससे सफलता नहीं मिलती है। कम की परिभाषा क्या है ? याद है वह डायलाग -एक बार मैंने कमिटमेंट कर दी तो खुद का भी नहीं सुनता हूँ। परिवर्तन के शुरू में दिल और दिमाग दोनों को बैलेंस करने का सर्वश्रेष्ठ मिसाल है। कमिटमेंट की सुनूँगा। खुद की नहीं। ऐसा संकल्प के बिना परिवर्तन संभव नहीं है।
Do -आप स्वीकार कर लो। खुद पर विश्वास रखो की आप कर सकते हो। कमिटमेंट भी आपने कर दी। लेकिन परिवर्तन तो आपको ,खुद को , करना पड़ेगा। कोई दूसरा आपके लिए नहीं कर पाएगा। करना पड़ेगा। करते रहना पड़ेगा। तब तक। जब तक परिवर्तन सम्पूर्ण ना हो जाए।
मैं दो उदहारण पेश करना चाहूँगा इस पद्धति को प्रमाण करने के लिए। एक अपने जीवन से। और एक भारतीय क्रिकेट टीम के २००३-०४ में ऑस्ट्रेलिया के सफर से।
मैं एक समय तक दिन में ४० सिगरेट पिया करता था। १९९३ के पहले दिन मैंने निर्णय लिया की मुझे सिगरेट पीना बंद करना क्योंकि स्वास्थ के लिए बहुत हानिकारक है। मैं उस वक़्त एक अंतरराष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल कंपनी में काम करता था जिसके कारन मैंने काफी पढ़ाई की थी और इस निष्कर्ष पर पहुंचा था। क्या बाधाएं थी मेरे इस परिवर्तन को हासिल करने में ? एक मुझे सिगरेट पीने में आनंद मिलता था और सुबह पहली चाय के साथ सिगरेट पीने का प्रातक्रिया पर प्रभाव- पूरी बात मानसिक था , वैज्ञानिक नहीं। मैंने पहले सुबह के चाय के साथ सिगरेट पीना बंद किया। ताकि शरीर का उस पर डिपेंडेंस ख़त्म हो जाए। एक महीने तक यह चलता रहा। ३१ जनवरी १९९३ को मैंने एक घंटे के दरम्यान २० सिगरेट पी। एक के बाद एक। इतना पिया की मुझे घृणा हो गई सिगरेट पीने से। तब से मैंने सिगरेट छुआ तक नहीं है। दोस्तोँ के महफ़िल में एक कश तक नहीं लेता हूँ। डर है कि वापस पीने ना लगूं। क्या सीखा मैंने ? प्लानिंग ,संकल्प और डिसिप्लिन के बिना परिवर्तन संभव नहीं है।
दूसरा उदाहरण हमें तेरह साल पहले इसी दिन भारतीय क्रिकेट टीम के ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर सिडनी टेस्ट के पहले दिन पर ले जाता है। २००३-०४ के इस दौरे पर हमारे लिटिल मास्टर पहले तीन टेस्ट मैच में नाकामयाब थे। विडियो विश्लेषण के माध्यम से उन्होंने यह समझा था कि वह ऑफ ड्राइव करते वक़्त विकेट के पीछे कैच आउट हो जा रहे थे। इस कमजोरी को स्वीकार करने के बाद उन्होंने अपने आप पर विश्वास किया और खुद से एक गज़ब कमिटमेन्ट किया -सिडनी टेस्ट मैच में वह किसी भी गेंद पर ऑफ ड्राइव नहीं करेंगे ! परिणाम -उन्होंने जिंदगी का सर्वाधिक टेस्ट स्कोर बनाया -नाबाद रह कर २४१ रन !
इस उदाहरण से हमने क्या सीखा ? आप अपने दुनिया के बेताज बादशाह हो सकते हो। फिर आपको परिवर्तन जरूरी है। और इस परिवर्तन को करने में आपका अहंकार आपका सबसे कठिन समस्या बन सकता है। परिवर्तन के लिए अहंकार पर काबू पाना जरूरी है। नहीं तो सफलता नहीं मिलेगी। अगर क्रिकेट का बादशाह अपने अहंकार को काबू कर सकता है , तो हम क्यों नहीं कर सकते हैं।
क्या आप इस नए साल में ABCD का प्रयोग करना चाहते हैं अपने लिए ? मुझे फेसबुक के माध्यम से जानकारी दीजिये। शायद मैं आपकी मदद कर सकूँ अगर आपने चाहा तो। खुश रहिये। स्वस्थ रहिए। यही दुआ मांगता हूँ सब के लिए। ऊपर वाले से। 

बुधवार, 7 दिसंबर 2016

नमस्कार। सर्दी के मौसम में आपका स्वागत। इस वक़्त हमारे देश में काफी हलचल मची हुई है पैसों के लिए। शायद हर भारत वासी का अपना सोच होगा इस विषय में। कुछ उस तरह जैसे कि मैंने अपने पिछले महीने के लेख में लिखा था -sully नामक पायलट के विषय में। क्या उसके पास हवाई जहाज को हडसन नदी पर उतारने के अलावा कोई विकल्प नही था ? क्या sully विमान को सबसे नजदीक के हवाई अड्डे पर नहीं उतार सकता था ? कुछ लोगों के लिए sully हीरो था और कुछ लोगों का विचार था कि उसने यात्रियों के ज़िन्दगी को खतरे में डाला था। कुछ अभी सर्वचर्चित निर्णय के विषय में इसी तरह के भावनाएं प्रदर्शित किए जा रहें हैं।
जाँच करने वाले कमीशन ने sully और उनके सह पायलट की काफी पूछताछ की। अंत में निर्णय किया गया कि कंप्यूटर की सहायता से उस दिन के उड़ान को simulate किया जाएगा। जो पाठक इस लेख को पहली बार पढ़ रहें हैं ,उनसे निवेदन करूँगा कि इस लेख को आगे पढ़ने से पहले ७ नवंबर को लिखा पिछले किश्त को ज़रूर पढ़े।
निर्णय के दिन मौजूद हर इंसान अपना सांस थाम कर simulation का परिणाम देखने के लिए तैयार था। पहला ,दूसरा ,तीसरा simulation -हर simulation अलग angle से कोर्टरूम में वीडियो स्क्रीन पर दिखाया गया। तीनो का एक ही संकर्ष -हवाई जहाज को नजदीकी हवाई अड्डे पर सही सलामत उतारा जा सकता था !sully और उनके सह पायलट का चेहरा क्या बता रहा था ? कोई परेशानी उनके चेहरे पे नहीं नज़र आई। उन्होंने केवल इतना कहा कि सिमुलेशन में चिड़ियों का झुंड हवाई जहाज के इंजन में घुसने के साथ ही पायलट जहाज को नजदीकी एयरपोर्ट पर उतारने के लिए तैयार हो जाता है। उसको सोचने में एक सेकंड का वक़्त भी नहीं लगता है। वास्तव में ऐसा नहीं हो सकता है। तीन से पाँच सेकंड का वक़्त देना पड़ेगा सोचने के लिए। तीन सेकंड का समय देने का निर्णय लिया जाता  है और दुबारा simulation को इस तीन सेकंड के अतिरिक्त समय के साथ बनाने का निर्देश दिया जाता है। कुछ समय बाद नए simulation को देखने के लिए फिर लोग एकत्रित होते हैं। फिर तीन angle .परिणाम तीनो बार हवाई जहाज नजदीकी हवाई अड्डे में उतरने में असफल होता है। sully का निर्णय सही साबित होता है। जज sully के प्रशंसा में एक भाषण दे देता है। sully सब सुनने के बाद एक ही बात करता है -इस विमान को सही तरह से उतारने में केवल उनकी तारीफ ही क्यों की जा रही है ?प्रशंसा विमान के हर कर्मी दल को प्राप्त है !यही है एक सही कप्तान का परिचय !टीम आगे। सफलता का श्रेय टीम को। केवल खुद का नहीं।
इसी गुण के अधिकारी हैं हमारे एक दिवसीय क्रिकेट टीम के कप्तान। आपने शायद गौर किया होगा कि ट्रॉफी जितने के बाद कप्तान टीम के हाथ में ट्रॉफी देकर पीछे चला जाता है। उनके जीवन पर आधारित फिल्म से हमें काफी सारी सीख मिलती हैं। सीख से पहले मैं तारीफ करना चाहता हूँ उस अभिनेता का जिन्होंने फिल्म में कप्तान का भूमिका निभाया है। चुकी हमने कप्तान को टीवी पर खेलते हुए इतनी बार देखा है इसलिए उनका किरदार निभाने वाले अभिनेता को उनको गौर से  देखना और समझना जरूरी है ताकि दर्शक को यह महसूस हो कि कप्तान खुद फिल्म में अभिनय कर रहें हैं। एक तरह से अभिनेता ने कप्तान का ज़िन्दगी जिया है। इस फिल्म में। ऐसा संकल्प और तैयारी ज़रुरत होती है इस तरह के सफलता के लिए।
कई सारी चीज़ें सीखने को मिलती है इस फिल्म से। मैं तीन सीख का ज़िक्र करूँगा।
पहली सीख है अपने गुरु या शिक्षक की बातों को सुनना -कप्तान फ़ुटबॉल खेलते थे बचपन में। क्रिकेट नहीं। उनके स्कूल के गेम्स टीचर ने कुछ हद तक ज़बरदस्ती ही उनको क्रिकेट खेलने पर मजबूर किया।  अगर कप्तान ने अपने टीचर की बात नहीं सुनी होती तो आज शायद मेरे इस लेख का विषय कुछ और होता।
दूसरी सीख है उनका रेलवेज का नौकरी छोड़ देना -जैसा फिल्म में दर्शाया गया है उन्होंने अपने पिताजी को नौकरी छोड़ने करने का कारण यह बताया कि उनको और तरक्की करने के लिए केवल क्रिकेट खेलना चाहिए और क्रिकेट के आय पर ही निर्भर हो जाना चाहिए ताकि उनका सुरक्षित नौकरी का सहारा ना रहे और उनमे सर्वश्रेष्ठ बनने की चाह हर वक़्त बरक़रार रहे। जो करना उसमे पूरी तरह डूबे बिना आप सर्वश्रेष्ठ नहीं बन सकते हो।
तीसरा सीख है उनके जीवन में परिवार , दोस्त , स्कूल के टीचर, प्रिंसिपल और ऑफिस के साथियों का योगदान। सबसे बड़ी बात यह है कि इतनी सफलता पाने के बाद भी कप्तान के ज़िन्दगी में इन सब लोगों का महत्व बरकरार है और अभी भी कप्तान उनको उतना ही सम्मान करते हैं। चाहे आपको कितनी भी सफलता मिले अपनों को मत भूल जाईयेगा कभी। उनका प्यार निःस्वार्थ है और रहेगा।
कैसा लगा आज का यह लेख। जरूर फेसबुक के माध्यम से बताइयेगा। इंतज़ार करूँगा। फिर मुलाकात होगी नए साल में। नए साल का अग्रिम शुभेच्छा ग्रहन कीजिएगा।