शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

नमस्कार। बधाई नए साल का। बधाई बाकि ज़िन्दगी के पहले दिन का। हर दिन हम लोगों के लिए बचे हुए ज़िन्दगी का पहला दिन होता है। फिर हम साल के शुरुआत को अलग अंदाज़ से क्यों देखते हैं ? नया साल। नए संकल्प। कितने दिनों के लिए ? मैंने भी संकल्प किया है इस नए साल पर। पेश करता हूँ आपके लिए।
जो बीत गई सो बात गई। अकसर मैं सोचता था कि पिछले साल अगर मैंने ऐसा किया होता या कोई घटना किसी और तरह से होती तो शायद बेहतर होता। यह सोचना कोई मतलब नहीं रखता है। इस नए साल में अतीत पर सोचने का समय बर्बाद नहीं करूँगा। क्योंकि अतीत को मैं बदल नहीं सकता हूँ। यह है मेरा पहला संकल्प। 
हर किसी का ज़िन्दगी का सफर अपना होता है। दूसरों की सफलता पर हम ईर्ष्या करते हैं। कभी दूसरों की कठिनाईओं के समय ऊपर वाले को अपने लिए धन्यवाद नहीं देते हैं। खुद कठिनाई में होते हैं तो अपने भाग्य को कोसते हैं। यह नहीं अनुभव करते हैं कि अन्य लोग हमसे कितना ज़्यादा और गंभीर कठिनाई का सामना कर रहे होंगे। अपनी ज़िन्दगी खुद को जीना है। मंजिल अपना मुझे तय करना है। और मंजिल तक पहुँचने का सफर मुझे खुद ढूढ़ना है। सबसे महत्वपूर्ण चिंता है कि इस सफर आनंद लेने की जिम्मेवारी मेरी है ,किसी और की नहीं। यह है मेरा दूसरा संकल्प। 
समय के साथ ज़िन्दगी बेहतर होती जाती है। ज़िन्दगी में उतार चराओ होता ही रहेगा। इस पर किसी का कोई कण्ट्रोल नहीं है। ऐसा कोई इंसान नहीं है जिसके ज़िन्दगी में असुविधा या कठिनाई ना हुई हो। विजेता वही है जो कि कठिन समय को दिमाग के साथ मुस्कुरा कर सामना करता है। अंग्रेजी में एक कहावत है -tough times do not last ;tough people do -कठिन समय सदा नहीं बरक़रार रहता है ; कठिनाई से जूझने वाले इंसान बरक़रार रहते हैं। मेरे काम के छेत्र में २०१७ एक कठिन साल रहा है। मैं अपने टीम को केवल एक ही दिशा की ओर प्रभावित कर रहा हूँ कि इस कठिन वक़्त को एक opportunity के अंदाज़ से देखो। निराश होने पर समय बेहतर नहीं बन जाएगा। कठिनाई कम नहीं हो जाएगी। टीम और खुद को ऐसी परिस्थितिओं से बेहतर जूझने के लिए तैयार करूँगा। 
समय और जीवन के इस सफर में लोग मेरे विषय में कुछ सोचेंगे ,बोलेंगे ,अपना विचार व्यक्त करेंगे। इस पर मेरा कोई कण्ट्रोल नहीं है। "कुछ तो लोग कहेंगे ,लोगों का काम है कहना "-अमर प्रेम का अमर गाना। छोड़ो बेकार की बातों में बीत ना जाए रैना। ऐसा कुछ नहीं करना है जिससे लोग आपके विषय ऐसा ना सोचे जो कि आप नहीं चाहते हो। आप लोगों के सोच को रोक नहीं सकते हो। क्या लोग सोच रहे हैं मेरे विषय में इस पर चिंता और समय बिताने का कोई मतलब ही नहीं होता है। सफलता और असफलता दोनों पर लोगों का मंतव्य है और रहेगा। मुझे इस साल इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यही है मेरा नए साल का एक और संकल्प। 
अंतिम संकल्प मेरे लिए ज़िन्दगी का एक दर्शन है। खेल तब तक जारी है जब आखरी गेंद नहीं फेका गया है। हम तब तक सफल होने का संभावना रखते हैं जब तक हम हाल नहीं छोड़ देते हैं। प्रयास हमारे हाथ में है। परिणाम नहीं। तब तक मैदान नहीं छोड़ना है जब तक संभावना है। तब तक हम असफल नहीं हुए हैं। ऐसा ही चल रहा है मेरे व्यवसाय में। देखता हूँ मैं इस संकल्प के जरिए सफल हो पाता हूँ या नहीं। 
क्या आप सहमत हो मुझसे ?अपना ख्याल व्यक्त करो फेसबुक के माध्यम से। मैं आपसे रोज फेसबुक पर वार्तालाप करूँगा। यह है मेरे नए साल का सबसे महत्वपूर्ण संकल्प। आपके साथ नए साल में नया रिश्ता बनाने का। प्रार्थना करता हूँ कि आपका , मेरा ,सबका ,२०१८ अब तक ज़िन्दगी का सबसे बेहतरीन साल हो। उम्मीद पे ही जीवन और ज़िन्दगी निर्भर है। 

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

नमस्कार। सर्दियों का मौसम कैसा बीत रहा है। कुछ लोगों को मजा आ रहा है। कुछ के लिए ठंडा ज़्यादा है। ठंडे के मौसम में गर्मियों की याद आती है ,और गर्मी के समय हमे सर्दियों का इंतेज़ार रहता है। यही ज़िन्दगी का सबसे कठिन पहलु है -हम सदा वही चाहते हैं जो नहीं है और उदास हो जाते हैं। जैसा की पिछले कई महीने में मैंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बेन -शहर के लेख का जिक्र किया था जिसमे उन्होंने हमें खुशियाँ बढ़ाने के विषय में बताया था ;उसी सिलसिले को बरक़रार रखते हुए मैंने एक मित्र से व्हाट्स एप्प के माध्यम से मिला एक और लेख को पेश करूँगा जो कि दो भाई के एक गज़ब कहानी को पेश करता है।
इस लेख के लेखक हैं नताली वाल्तेरस जिन्होंने दो भाई -बर्ट और जॉन जेकब्स -की आत्मकहानी को एक छोटे से लेख में पेश किया है। इन दोनों भाई ने मिलकर एक १०० करोड़ की टी -शर्ट बनाने वाली कंपनी बनाई है जिसका नाम है -life is good -जिंदगी अच्छा है। सच में अगर आप गौर करें जिंदगी अच्छा है। केवल इस चिंता की जिम्मेवारी अपनी है। अगर हम सोचे जिंदगी अच्छी है। तो वह अच्छी है। नहीं तो सर्दियों में हम गर्मी मांगते रहेंगे और गर्मियों में सर्दी।
कैसे इन दोनों भाई ने life is good के बारे में सोचा ? इनका जन्म अमेरिका के एक गरीब परिवार में हुआ। ६ बच्चों में ये दोनों सबसे छोटे थे। बचपन में इनके माता -पिता का एक मोटर दुर्घटना में काफी चोट लगी। माँ के कई हड्डियाँ टूट गई और पिता ने अपना दहना हाथ खो दिया। पिताजी अपने हाथ को खोने के बाद बहुत ही चिरचिरे और गुस्से वाले हो गए। बात -बात पर गुस्सा होने लगे और ज़िन्दगी को अनिश्चयता के साथ जीने लगे। काफी कठिन परिस्थितियों के साथ इस परिवार को जूझना पड़ा। इस माहौल में भी इनकी माँ ने अपना विश्वास बरक़रार रखा कि ज़िन्दगी अच्छी है। हर रात डिनर के वक़्त हर बच्चे को यह बताना था कि उस दिन अच्छा क्या हुआ था। केवल इसी कारण दिन के अंत एक अदभुत पॉजिटिव एनर्जी का एहसास होता था -पुरे परिवार को। जॉन का मानना है कि यह दैनिक सिलसिला उनको एक पीड़ित इंसान की तरह महसूस करने से रोकता था -"आज यह नहीं हुआ ,यह नहीं मिला ,यह कठनाई हुई आज "-इन सब चिंता दूर हो जाते थे अपने रात में डिनर टेबल पर। जब कुछ भी नहीं था ,पूरी परिवार के पास उम्मीदें जरूर मौजूद थी।
उनकी माँ ने उन्हें कभी मायूस नहीं होने दिया। रसोई घर में खाना बनाते वक़्त गाना गाना ;बच्चोँ के साथ उनके पढाई को अभिनय के जरिए समझाना ;उनके साथ कविताएँ दोहराना -चाहे परिस्थिति कितना ही प्रतिकूल क्यों ना हो ने बच्चों को एक ज़बरदस्त सीख दिया -खुश रहना परिस्थितयों पर निर्भर नहीं करता है। "माँ ने कठिन समय को उम्मीद के साथ सामना करने को सिखाया। क्योंकि ज़िन्दगी अच्छा है। "
इसी अटूट विश्वास को दोनों भाई ने अपनी ज़िन्दगी का और बिज़नेस का मकसद बना लिया है। उनका कहना है कि उम्मीद ही जीने का सबसे शक्तिशाली सोच है। उनका मानना है कि ज़िन्दगी परफेक्ट नहीं है। ना ही ज़िन्दगी आसान है। परन्तु ज़िन्दगी अच्छा है।
जैसा कि उनकी माँ उनसे दिन में हुए अच्छे घटनाओं का ज़िक्र करवाती थी ; दोनों भाई भी अपने कर्मचारियों को मिलते वक़्त एक ही अनुरोध करते हैं -कुछ ऐसा बताओ जो की अच्छा हुआ है। इस सोच का परिणाम बेहतरीन है। "इसके कारन अच्छे विचार सामने आते हैं ;इन विचारों के जरिए प्रगति होती है ;प्रगति ही सफलता की नीव है ;और पूरी कम्पनी का फोकस सफलता पर है ना कि कठिनाईओं पर। "यही विश्वास है दोनों भाई का।
ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत है ,क्योंकि आप एक अच्छे इंसान हो। यह मेरा विश्वास है। मिलेंगे नए साल। नया साल और आनंदमय हो। यही उम्मीद पर भरोसा रखता हूँ। और धन्यवाद करता हूँ मेरे दोस्त पीटर चित्तरंजन को इस तरह के प्रभावशाली लेख को शेयर करने के लिए।
क्या आप सहमत हैं दोनों भाई के विश्वास से ?जरूर अपना सोच ज़ाहिर कीजिए ,मेरे साथ ,फेसबुक के माध्यम से। उम्मीद रखता हूँ ,आप पर। 
नमस्कार। आशा है कि त्योहारों का मौसम अच्छा रहा आपके और अपनों के लिए। पिछले दो लेख में मैंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बेन -शहर के सलाह का ज़िक्र किया है जिन्होंने ज़िन्दगी से और खुश होने के १४  सलाह दिए हैं। इस लेख में अंतिम चार सलाह का ज़िक्र करूँगा। उन पाठकों के लिए ,जिन्होंने पिछला दो लेख ना पढ़ा हो ,मैं प्रोफेसर का प्रथम दस  सलाह को पेश कर रहा हूँ।
आपके पास जो भी है उसके लिए ईश्वर का शुक्रगुज़ार रहो। शारीरिक एक्सरसाइज रोज जरूरी है। दिन का सबसे महत्वपूर्ण है ब्रेकफास्ट। assertive बनना सीखें। अभिज्ञता अर्जन करने के लिए पैसे निवेश करना आवश्यक है। कठिनाई को नज़र अंदाज़ ना करके जल्द से जल्द सामना करें -जितनी देर कीजिएगा उतनी तकलीफ होगी। अपने आस पास अपने खुशियों के समय का वातावरण तैयार कीजिए। अन्य लोगों के साथ अच्छे से पेश आईये और मुस्कुराइए। जूते ऐसा पहनिए ताकि आपके पैरों में दर्द ना हो ,अन्यथा आपके मूड पर बुरा प्रभाव रहेगा। रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। आपको खुद पर ज़्यादा कॉन्फिडेंस मिलेगा। लोग आप पर ज़्यादा भरोसा करेंगे।
पेश है अंतिम चार सलाह। संगीत हमारी ज़िन्दगी का अहम् हिस्सा है। आप ऐसा किसी को जानते हो जो कि संगीत से नफरत करता है ? मैं मिला हूँ कुछ लोगों से जो कि संगीत से नफरत नहीं करता है लेकिन जिनमे संगीत का आनंद लेने का कोई दिलचस्पी नहीं है। शत प्रतिशत ऐसे लोग जिनसे मैं मिला हूँ अपनी ज़िन्दगी से दुखी हैं और उनको किसी चीज़ से ख़ुशी नहीं मिलती है। विज्ञानं कहता है कि गाना सुनते वक़्त हम अक्सर अपने साथ गुनगुनाते हैं। इस अपने आप के साथ गुनगुनाना एक अलग आनंद का अनुभव दिलाता है। संगीत दोस्त बनाने में भी बहुत मदत करता है। आप अकसर उन अजनबी से ज़्यादा करीब बन जाते हैं जिनका संगीत का चॉइस आपसे मिलता जुलता है। इसका तात्पर्य यह नहीं होता कि अगर मेरा म्यूजिक का टेस्ट आपसे अलग हो तो हमारी दोस्ती हो नहीं सकती। मेरा तो मानना है कि हम जितना अलग -अलग घराने का संगीत का आनंद उठा सकेंगे ,उतनी ही हमारी ज़िन्दगी में नएपन का अहसास होगा जो कि हमें और भी आनंद देगा।
आपका मूड आप क्या खातें हैं उस पर निर्भर करता है। हर तीन -चार घण्टे में थोड़ा -थोड़ा खाना लीजिए। इससे आपका ग्लूकोज़ लेवल बरक़रार रहेगा जो कि आपके मूड को ठीक रखेगा। मैदा और चीनी का कम इस्तेमाल कीजिए। यह भी ग्लूकोज़ बढ़ा देता है। ऐसा खाना लीजिए जो स्वास्थ के लिए फायदेमंद है। सब कुछ खाइये लेकिन संयम के साथ। तरह -तरह का खाना खाइये ताकि आप खाने से बोर ना हो जाए। ना बोर होना आनंद का कारन है।
खुद का ख्याल रखिए और अपने आप को अट्रैक्टिव महसूस कीजिये। रिसर्च के अनुसार ७० प्रतिशत लोग जो खुद में दिलचस्पी लेते हैं और अपने आप को आकर्षणीय मानते और महसूस करते हैं ; जिंदगी में खुश दिखते हैं। आकर्षणीयता के साथ आपके रूप का संबंध नही है। यह एक मानसिक स्टेट है। अगर आप गूगल के माध्यम से मेरी तसवीर को देखेंगे , तो आपको एक साधारण इंसान दिखेगा। परन्तु अगर आप मेरे चेहरे पर गौर कीजिएगा तो मुझमे एक कॉन्फिडेंस नज़र आएगा जो मेरा आकर्षण का कारन है। हम चेहरे के साथ जन्म लेते हैं ,लेकिन अपने चेहरे का प्रयोग हम पर निर्भर करता है।
अंत में ईश्वर पर विश्वास रखिए। उनके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है। खुशियाँ एक रिमोट कण्ट्रोल के तरह है। हर बार हम खुशियां खो देते हैं ,हम उसे ढ़ूढ़ने में पागल हो जाते हैं। कई बार ऐसा होता है हमें यही पता नहीं होता है कि हम खुद खुशियों पर विराजमान है लेकिन ख़ुशी ढूंढ रहे हैं। ऐसा हुया है कभी आपके साथ ? कब होता है ऐसा ?जब हम अपनी ख़ुशी को नज़र अंदाज़ करके दूसरों की ख़ुशी पर ईर्ष्या करते हैं। दूर का घास हमेशा ज़्यादा हरा दिखता है।
धन्यवाद प्रोफेसर बेन -शहर , हमारे ज़िन्दगी को और ख़ुशी के साथ जीने में मदत करने के लिए। आप खुश रहे और दूसरों को ख़ुशी से रहने दें। अगर आप मेरे साथ फेसबुक के माध्यम से मुलाकात करेंगे तो हमें बेहद ख़ुशी होगी। इंतेज़ार करूंगा। 

मंगलवार, 3 अक्तूबर 2017

नमस्कार। आप सभी को विजया दशमी की शुभकामनाएँ। आशा रखता हूँ कि त्यौहारों का यह मौसम आपका अच्छा बीत रहा है। विजया दशमी बुरे पर अच्छे के जीत को दर्शाता है। मेरा विश्वास है कि अंत में अच्छाई की जीत होती है। पिछले महीने हमने हार्वर्ड के  प्रोफेसर बेन -शहर के पाँच मंत्रों का जिक्र किया था जो कि इंसान को और ज्यादा खुशियाँ दे सकता है। जिन्होंने पिछला लेख नहीं पढ़ा होगा उनके लिए एक बार फिर पाँच सन्देश, प्रोफेसर का -आपके पास जो भी है उसके लिए ईश्वर का शुक्रगुज़ार रहो। शारीरिक एक्सरसाइज रोज जरूरी है। दिन का सबसे महत्वपूर्ण है ब्रेकफास्ट। assertive बनना सीखें। अभिज्ञता अर्जन करने के लिए पैसे निवेश करना आवश्यक है।  इस लेख में और पाँच सुझाव का ज़िक्र करूँगा जो मैंने प्रोफेसर के विषय में लिखे एक व्हाटस एप्प मैसेज से सीखा है। यह लेख उस व्हाट्स एप्प मैसेज से अनुप्राणित है। मूल विचार जो प्रोफेसर बेन -शहर का है उस पर मैंने अपनी ज़िन्दगी के सीख से भी सवाँरा है।
ज़िन्दगी में कठिनाई आएँगी। उनका जल्द सामना करना जरूरी है। जितना आप कठिनाई से जूझने में देरी करोगे उतना ज्यादा दर्द आपको सहना पड़ेगा। रिसर्च यही बोलता है। जितना विलम्ब उतना टेँशन। हर हफ्ते के लिए छोटे टास्क लिस्ट्स बनाए और उसे ख़त्म कीजिए। इसी में मंगल है।
आपके चारो ओर ख़ुशी के याददाश्त से भर दें। अपने चाहने वालों की तसवीरें , पुरस्कार जो आपने जीते होंगे , खुशियों वाली उपहार। क्यों ऐसा करना जरूरी है ? किसी के भी ज़िन्दगी में गम से ज़्यादा खुशियाँ हैं। परन्तु हम अपना चिंता ज़्यादा गम पर करते हैं। खुशियों का आनंद नहीं ले पाते हैं। मन खुशियों से और खुश होता है। केवल गम के विषय में सोचकर नहीं।
हमेशा दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करें। पहली बार दिन में मिलते वक़्त विश करें। आपके मुस्कुराहट का जवाब मुस्कुराहट से मिलेगा। मुस्कुराने से एनर्जी बढ़ती है। और एनर्जी ही ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सम्पद है। अक्सर हम किसके साथ मुस्कुरा कर बात करेंगे इसका एक मन ही मन चयन कर लेते हैं। इसके फलस्वरूप हम कम लोगों के साथ मुस्कुराते हैं। और यहीं खुद का एनर्जी कम कर लेते हैं।
डॉ वापनेर जो कि अमेरिकन ऑर्थोपेडिक्स एसोसिएशन  के प्रेसिडेंट हैं कहते हैं की हमारे मूड का निर्धारण करने का एक महत्वपूर्ण वजह है हमारे जूते। जूते पहनकर अगर कोई दर्द महसूस करें या हमारे चलने में कोई असुविधा हो तो हमारा मूड ख़राब हो जाता है। मैंने कभी भी इस विषय में इस तरह से नहीं सोचा था। लेकिन जब मैं अपनी ज़िन्दगी के सफर के साथ इस टिप्पणी को जोड़ूँ तो यह एकदम सही नज़र आता है। नए जूतें जब तक अपने पाँवों पर सेट नहीं हो जाते हैं ,मूड नहीं बनता है।
मुंशी प्रेमचंद का एक बेहतरीन लेख था -रीढ़ की हड्डी। अगर हम अपने रीढ़ की हड्डी को सीधा नहीं रख सकते हैं तो ज़िन्दगी में कॉन्फिडेंस का अभाव रहेगा और कॉन्फिडेंस के बिना मूड नहीं बनता। ज़िन्दगी का आधा से ज़्यादा मजा तो सेल्फ कॉन्फिडेंस देता है। इसके बिना जीना ही बेकार है। आपके चाल से अक्सर लोग आपके बारे में अपना धारणा बनाते हैं। अगर आप कॉंफिडेंट दिखें तो आपके आस पास के लोग भी आपको उसी तरीके और अंदाज़ से पेश आएँगे।
अगले महीने अंतिम चार टिप्पणियाँ प्रोफेसर के। तब तक खुश रहिए और दिवाली खुशियों के साथ बिताइए। ख्याल रखिए ज़िन्दगी से और बहुत कुछ  पाना है। ख़ुशियाँ हम सबके हातों में है। केवल उसे समझना पड़ेगा और प्रोफेसर के दिए गए टिप्पणियों को प्रयोग कर के और बढ़ाना है।





शुक्रवार, 29 सितंबर 2017

बारिश का प्रकोप हमारे देश के अलावा इस वक़्त अमेरिका में भी बहुत भयंकर है। काफी नुकसान पहुँचा है लोगों को और उनके संपत्ति को। जिन लोगों को असुविधा हुई है उनको अब महसूस होता है दुसरों पर क्या बीती होगी ऐसी परिस्थितयों में। हम अक्सर दूसरों के दुःख या कठिनाई को तब महसूस करते हैं जब हम खुद उस कठिनाई से गुजरते हैं।
हर इंसान खुश रहना चाहता है। हम कोशिश करते हैं कि हम वैसा सब कुछ करें जो कि हमें खुशियां दे। परन्तु क्या हम खुश हैं ? शायद नहीं। इसी कारण आज और अगले कई महीनो में मैं चर्चा करूँगा कि हम और ज्यादा कैसे खुश रह सकते हैं ? मैं बात करूँगा प्रोफेसर बेन शहर का जो कि विश्व के प्रसिद्द हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं how to learn to be happier ? आंकड़ो के मुताबिक हार्वर्ड विश्वविद्यालय में जितने लोग पढ़ने आते हैं , उनमे से २० प्रतिशत लोग प्रोफेसर शहर का यह पाठ्यक्रम में जरूर दाखिला लेते हैं। प्रोफेसर के मुताबिक उनका क्लास ख़ुशी ,आत्मसम्मान और मोटिवेशन पर केंद्रित है। उनका विश्वास है कि इसके कारन विद्यार्थिओं को सफलता और आनन्द पाने में सुविधा होती है। प्रोफेसर को लोगों ने  'happiness गुरु ' का भी उपाधि दिया है।
प्रोफेसर अपने ज़िन्दगी को सुधारने के लिए और ज़िन्दगी में पॉजिटिव प्रभाव डालने के लिए १४ उपाय का ज़िक्र किया है। इस लेख में मैं पहले पाँच  उपाय का ज़िक्र करूँगा।  बाकि आगे के लेखों में।

  1. आपके पास जो है , जितना भी है , उसके लिए पहले ईश्वर को धन्यवाद दीजिए। एक कागज पर उन १० चीजों को लिख लीजिए जो कि आपको आनंद देता है। उन चीजों पर ज्यादा समय बिताइये और नज़र डालिए। इसी में आपका आनन्द बढ़ेगा। 
  2. शारीरिक चर्चा अवश्य कीजिए -रिसर्च कहता है कि शारीरिक एक्सरसाइज आपका मूड बेहतर करता है। तीस मिनट का एक्सरसाइज दुःख और स्ट्रेस को घटाता है।  यह प्रमाणित है। 
  3. सुबह का नाश्ता जरूर कीजिए -कुछ लोग समय के अभाव के कारन या मोटापा घटाने के उद्देश्य से ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं। यह गलत करते हैं। रिसर्च कहता है कि ब्रेकफास्ट आपको एनर्जी देता है जो आपको सोचने में मदत करता है और आपको अपने काम को सफलता के साथ करने में मदत करता है।
  4. assertive बनिए -चाहिए जो आप चाहते हैं। कहिए जो आप सोचते हैँ। assertive होने से आपका आत्मसम्मान बढ़ेगा। चुप रहने से या किसी चाहते हुए चीज का हिस्सा ना बन सकने पर आपको आपको उदासी महसूस होती है। और हम उम्मीद और हौसला खो देते हैं। 
  5. तजुर्बा बढ़ाने के लिए पैसे खर्च कीजिए -७५ प्रतिशत लोग जिन्होंने निवेश किया है सफर करने में ताकि नए जगह और लोगों से सीख सके या कोई नए विषय का अध्ध्यन करें ;उन्हें ज़िन्दगी से अधिक आनन्द मिला है। कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हे चीज़ें खरीदने पर ज़्यादा आनंद महसूस हुआ है। 
काफी चीज़ें जिसका ज़िक्र प्रोफेसर ने किया है , हम करते हैं। प्रश्न जो हमें खुद से करना है कि हम अपना कितना समय इन चीज़ों पर देते हैं और कितना समय हम उन चीज़ों को देते हैं जिसके कारन हमें ख़ुशी नहीं मिलती है। पड़ोसी ने वही गाड़ी खरीदी है जो कि आपका सपना है। हम ईर्ष्या ज्यादा करते हैं नाकि खुश होते हैं उनकी सफलता पर। 
अगले महीने पाँच और उपाय प्रोफेसर के। तब तक केवल खुद का एक मूल्यांकन कीजिए आप assertive हैं या नहीं ?मेरा तजुर्बा कहता है कि हम अधिकतर लोग assertive नहीं है। बनना कठिन है। बन जाने पर ज़िन्दगी से अवश्य ज़्यादा आनंद मिलता है। कोशिश कीजिये। आप अपने आपको एक नए अंदाज़ से देखिएगा। यही ज़िन्दगी है। हर सुबह एक नई सुबह। खुद नए अंदाज़ में क्यों नहीं !

शुक्रवार, 11 अगस्त 2017

पिछले महीने में मैंने रिश्तों के विषय में चर्चा किया था। मेरा मूल सन्देश रिश्तों में एक दूसरे को पर्याप्त स्वाधीनता देना था। क्या अपने रिश्तों में स्वाधीनता का प्रयोग किया है मेरे लेख को पढ़ने के बाद ? फायदा दिख रहा है ? रिश्तें मजबूत बन रहें हैं ? मजबूत रिश्ते अक्सर इंसान को उदास करते हैं।
जैसा की मुझे। इस वक़्त। मेरा छोटा बेटा ग्रेजुएशन के लिए आज अमेरिका के लिए रवाना हो रहा है। घर पे उदासी है। इतना दूर जा रहा है। दोस्त और रिश्तेदार का कहना है -ग्रेजुएशन इंडिया में करना चाहिए था -उसके बाद विदेश में पढ़ना बेहतर होता -जैसा कि मेरे बड़े बेटे ने किया था।
क्यों उदास हूँ मैं ? ऐसे तो बेटा पढ़ाई लिखाई ,गिटार ,दोस्त लेकर व्यस्त ,मैं अपने काम और कई और चीज़ों को लेकर व्यस्त। कितना समय एक साथ गुजारते हम। दिन में एक घण्टा औसत में। बच्चे बड़े हो जाने पर अपना स्वतंत्रता चाहते हैं जिसका मैंने ज़िक्र किया था। और जो मैंने दिया है। रिश्तों का एक महत्वपूर्ण सीख है इस अनुभूति में- ज्यादा समय साथ में नहीं गुजारते हैं जब कोई पास है ,परन्तु दिल नहीं चाहता है कि वह दूर जाए। यह रिश्ते के मजबूती को दर्शाता है। ज़िन्दगी में कई लोगों के साथ रोज का मिलना -जुलना होता रहता है ,लेकिन वह अगर हमसे दूर हो जाएँ तो कुछ ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता है। कई और लोग होते हैं -खासकर सच्चे दोस्त -जिनके साथ सालोँ से मुलाकात नहीं होती हैं ,लेकिन हमें पता रहता है ,कि वह हमारे लिए है ,कभी भी ,कहीं भी -ना मौजूद रहने पर भी ,दिल से करीब है। यही रिश्ते अति मूल्यवान हैं। इन्हे संवारना ज़िन्दगी के लिए ज़रूरी है।कभी -कभी इस तरह के गभीर रिश्ते हमें अँधा बना देते हैं। जिसके कारण हम अपने अपनों को कभी -कभी उनकी सपनों से वंचित करते हैं। कोई पाठक है जिनके अभिभावकों ने आपको घर से दूर जाने की इजाजत नहीं दी है ,पढ़ने के लिए ,आपके चाहते हुए भी। मैंने अपनी ज़िन्दगी में कई पिता को देखा है अपनी बिटिया को वंचित करते हुए ऐसी परिस्थितियों में। क्यों बच्चे अपने सपनो को न्योछावर करेंगे ,आपकी भावनाओं की खातिर। अगर कोई अभिभावक इस वक़्त मेरा यह लेख पढ़ रहें हैं ;मैं उनसे निवेदन करूँगा की बच्चों को उनके सपने को सच करने का मौका दें -रिश्तों का लिहाज़ तभी होता है।
इस लेख को लिखते वक़्त मुझे अपने माता -पिता की याद आ रही है। ज़रूर वह अपनी दुनिया से अपने नाति का मार्ग दर्शन कर रहें हैं। उनके आशीर्वाद के बिना कुछ संभव नहीं है। अगर वह इस दुनिया में होते तो गर्व से सबको बताते। एक विषय के बारे में मैं शत प्रतिशत कॉंफिडेंट हूँ -वह नाति को कभी भी हमसे इतना दूर पढ़ने जाने से नहीं रोकते। क्योंकि  उन्होंने ३७ साल पहले अपने इकलौते संतान को सोलह साल की नाजुक उम्र में पढ़ने के लिए बिहार के छोटे शहर से मद्रास जाने से नहीं रोका था। उन दिनों पोस्टकार्ड पर पत्र लिखने के अलावा योगायोग के साधन बहुत सीमित थे। इंडियन एयरलाइन्स के कुछ फ्लाइट हुआ करते थे ,बड़े शहरों के बीच ;ट्रंक -कॉल बुक करना पड़ता था ,फ़ोन पर बात करने के लिए। जमालपुर से मद्रास पहुँचने मे अड़तालीस घण्टे का समय लगता था। आज मैं जो कुछ भी हूँ ,अपने माता -पिता के निस्वार्थ निर्णय के कारण -अपने दिल और भावनाओं पर पत्थर रख कर मुझे मद्रास जाने का अनुमति देना। बाबा -माँ ,आज मैं महसूस कर रहा हूँ आपके भावनाओं को जब मैं खुद उन भावनाओं से गुज़र रहा हूँ। अभी तो टेक्नोलॉजी के कारण योगायोग के उपाय हमारे मुट्ठी में हैं। फिर भी मेरी उदासी आपके दिल में हो रही उथल -पुथल का एहसास दिला रही है जब मैंने घर छोड़ा था ३७ साल पहले। धन्यवाद आप दोनों को आपके निर्णय के लिए।
थोड़ा भावुक हो गया हूँ। पिछले दिनों मैं मैडम रीता बिबरा जी से बात कर रहा था। रीता जी कई स्कूल और कॉलेज को मैनेज करती है। मैं उनका फैन हूँ -उनके जीवन दर्शन के कारण। उनसे बात हो रही थी इस सन्दर्भ में। मैंने कहा कि हर इंसान अपने चुने हुए रास्ते पर सफर करता है। और अंत में जो होता है ,अच्छा ही होता है। रीता जी ने मेरी सोच ठीक कर दी। उन्होंने कहा -रास्ता हमने नहीं चुना है ;ऊपर वाले ने हमारे लिए चुना है। और उनके लिए हम सब एक हैं। धन्यवाद रीता जी मेरे जीवन का मार्ग दर्शन को नई दिशा देने के लिए। आपका मैं आभारी रहूँगा।
 इन दिनों रीता जी की तरह कई लोगों ने अपने सोच से मुझे प्रभावित किया है ,ज़िन्दगी को नए अंदाज़ में जीने के लिए। उन सबके विषय में लिखूँगा आगे के सफर में. साथ निभाईएगा हमारा ?


गुरुवार, 3 अगस्त 2017

नमस्कार।  कैसे हैं आप ?कैसा चल रहा है आपका ब्रैंड बिल्डिंग का प्रयास ?पिछले महीने में मैंने ब्रैंडिंग के CDE का ज़िक्र किया था और ब्रैंड क्रिएशन के विषय में विस्तृत बात चीत की थी। याद है आपको ? ब्रैंड क्रिएशन में पांच चीज़ों का ख्याल रखना परता है।

  • कोई भी ब्रैंड हर किसी के लिए नहीं होता है। 
  • ब्रैंड एक रिश्ता है।  जिसके साथ ब्रैंड रिश्ता जोड़ना चाहता है उसको रिश्ते से क्या मिलेगा ?
  • अपने ब्रैंड का परिचय या आइडेंटिटी क्या है ?
  • आपका ब्रैंड प्रॉमिस क्या है ?
  • One never gets a second chance to create the first impression .इसके लिए आपका कम्युनिकेशन और ग्रूमिंग महत्वपूर्ण है। 
आज हम चर्चा करेंगे ब्रैंड development का। आपने ऊपर बताई गई पांच बातों का निर्णय ले लिया है और अब आप तैयार हैं अपने ब्रैंड को आगे बढ़ाने के लिए। चूँकि ब्रैंड एक रिश्ता है जितने लोग आपके ब्रैंड से जुड़ेंगे उतना ही आपके ब्रैंड का डेवलपमेंट होगा। बात इतनी सहज है। इसके लिए आपको क्या करना पड़ेगा ?

कोका कोला को विश्व का सबसे मूल्यवान या वैल्युएबल ब्रैंड माना जाता है। एक मीडिया इंटरैक्शन में कोका कोला कंपनी के चेयरमैन ने  इस सफलता के पीछे एक सरल प्रयास का ज़िक्र किया था - उनकी कंपनी का ब्रैंड डेवलपमेंट का एकमात्र उपाय है अधिक से अधिक लोगों को कोका कोला पीने के लिए मोटिवेट करना।  जितने अधिक लोग कोका कोला पियेंगे उतना ही ब्रैंड वैल्यूएशन बढ़ेगा। 

इस कोका कोला के उदाहरण से मिलती है हमारी पहली सीख -keep it simple
 इस गतिमय ज़िंदगी के सफर में किसी के पास आपके ब्रैंड और ब्रैंड प्रॉमिस को समझने के लिए समय नहीं है। आपका  ब्रैंड क्या कर सकता है -उनके लिए जिनके साथ आपका ब्रैंड रिश्ता जोड़ना चाहता है -उनको यह समझने में कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। इसका एक बेहतरीन उदाहरण है - Google. Google के प्रतिष्ठाताओं ने यह समझा कि हर वक्ति को  यह पता है कि वह क्या ढूंढ रहा है -उसे यह नहीं मालूम ढूढ़ना कहाँ है !इसी का प्रॉमिस किया Google ने। कुछ भी ढूढ़ना हो -Google करो !
दूसरी सीख Google से है -जो वादा किया निभाओ , लोग तुम्हारे ब्रैंड की पब्लिसिटी खुद करेंगे। Google के विषय में आपने पहली बार कैसे जाना ?शायद आपको याद भी नहीं होगा। जरूर किसी से सुना होगा जिसने आपसे पहले गूगल को एक्सपीरियंस किया होगा। आप अपने कर्तव्यों से अपना ब्रैंड बनाते हो। अपने पड़ोस में जरूर कोई ऐसा इंसान है  जिस  पर लोगों का आस्था होगा किसी भी प्रकार के मदत के लिए। यही उस व्यक्ति का ब्रैंड आइडेंटिटी और प्रॉमिस है। आपने यह भी देखा होगा कि इस व्यक्ति से कोई भी बिना किसी झिझक के सहायता मांगता है। क्यों ? क्योंकि यह व्यक्ति कभी भी ,कहीं भी मदत करने के लिए तत्पर है। गूगल की तरह। इसी से मिलती है हमारी तीसरी सीख
कंसिस्टेंसी परफॉरमेंस का -ज़रा सोचिये -आपके किसी मित्र ने आपके शहर के किसी रेस्टोरेंट में खाना खाकर उसकी काफी प्रशंषा की और आप अपने परिवार के साथ उस रेस्टोरेंट में खाने के लिए गए। उस दिन किसी कारण रेस्टोरेंट का हर खाना खराब रहा। क्या आप फिर वहाँ जाओगे ? खुद तो नहीं जाओगे ;अपने परिचित लोगों को वहाँ जाने से रोकोगे। कोई इंसान इन्कन्सीस्टेन्ट परफ़ॉर्मर के साथ रिश्ता जोड़ना नहीं चाहता है -भरोसा नहीं मिलता है। क्रिकेट में सचिन तेंडुलकर क्यों इतना बड़ा ब्रैंड है -क्योंकि १२० करोड़ भारत वासिओं का उन पर आस्था है। जो क्रिकेटर ने जितनी कंसिस्टेंसी से परफॉर्म किया है ;उतना ही बड़ा ब्रैंड बना है। एक और ब्रैंड है राहुल द्रविड़।
हमारी अगली सीख राहुल द्रविड़ से है -बदलते हुए  ज़रूरतों के साथ अपने ब्रैंड को भी बदलना पड़ेगा। 
आपको याद होगा उनके कैरियर के शुरुआत में राहुल द्रविड़ को  वन डे क्रिकेट के लिए अनसूटेबल माना जाता था। १९९९ के पहले उन्हें भारत के एक दिवसीय टीम से बाहर रखा गया था। उन्होंने कड़ी मेहनत की ;टीम में वापसी की और इतना ही नहीं; इंग्लैंड में खेले गए वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के सर्वाधिक रन स्कोरर भी बने। कुछ दिनों पहले आपने उनकी सफलता IPL में भी देखी।
इसी से हमारी आखरी सीख आती है -आपका ब्रैंड ambition क्या है ?आप अपने ब्रैंड को किस मंज़िल पर ले जाना चाहते हो? हर गंतव्य के साथ आपको यह भी निर्धारित करना पड़ेगा कि आप कितने समय में और कैसे अपनी मंज़िल तक पहुचेंगे। कुछ इस तरह जैसे आप अपने घर  से रेलवे स्टेशन पहुँचते हो ट्रेन पकड़ने के लिए।
ब्रैंड एम्बिशन के उदाहरण स्वरुप मैं एक व्यक्तिगत अनुभव का ज़िक्र करना चाहता हूँ। पिछले सप्ताह मैं काम के सिलसिले में मुंबई गया था। वहाँ मैंने एयरपोर्ट से शहर तक का सफर 'प्रियदर्शिनी -वोमन पॉवर' टैक्सी में किया। वाहन चालक सनोवर नाम की एक महिला थी। सनोवर दिन में टैक्सी चलाती है और रात में अपने दो बच्चो और पति के लिए घर में खाना बनाना ,बच्चों को पढ़ाना और घर की और सब काम करती है। सनोवर से बात करने पर उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनको गाड़ियों में बहुत दिलचस्पी थी और एक दिन गाड़ी चलाने का सपना देखती थी। एक गरीब परिवार के सदस्य होने की वजह से  कई लोगों ने उनको अपने इस सपने को भूल जाने कि सलाह दी. क्योंकि उनका सपना सार्थक होने का  संभावना काफी कम था । सनोवर ने हार नहीं मानी।
सनोवर ने गाड़ी चलाने और सेल्फ डिफेन्स का तालिम लिया जो कि 'वोमन पॉवर' ड्राइवर बनने का क्राइटेरिया था। उनकी सफलता पर मुबारक़ देने पर उन्होंने पूरा श्रेय अपने पति और बच्चों को दिया जिनके समर्थन के बिना यह संभव नहीं हो पाता ।
मेरे लिए सनोवर एक ब्रैंड का उत्कृष्ट मिसाल है। यह प्रमाण करती है कि सपने के साथ अपनों का साथ हो और सफलता पाने का पैशन हो तो कुछ भी हो सकता है।
क्या आप प्रेरित हैं अपने ब्रैंड क़ो आगे बढ़ाने का ?
नए साल संकल्प बनाने  का सर्वश्रेष्ठ अवसर माना जाता है। अगले साल आप अपने ब्रैंड को किस दिशा में आगे बढ़ाना चाहते हैं तय कर लीजिये। मंज़िल की ओर यात्रा शुरू करने का प्लानिंग इन कुछ दिनों में ही करना पड़ेगा। आपकी यात्रा सफल हो -यही हमारी शुभकामना है आपके लिए, नए साल का।